यूपी ग्रामीण विकास प्रशिक्षण: 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण पूरा, डिजिटल रोस्टर से और व्यवस्थित होंगी गतिविधियां

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तेजी; 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल डेटा एंट्री और ऋण प्रबंधन की दी गई जानकारी

UP Rural Development Training: उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के बाद डिजिटल मासिक एवं त्रैमासिक रोस्टर प्रणाली से प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। UPSIRD में एमआईएस सहायकों और लेखाकारों का 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण पूरा हुआ।

लखनऊ। ग्रामीण विकास से जुड़े कार्मिकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के अनुपालन में अब प्रशिक्षण कार्यक्रमों को डिजिटल मासिक एवं त्रैमासिक रोस्टर प्रणाली के अनुसार संचालित किया जा रहा है। इसके तहत प्रतिभागियों के आवास, प्रशिक्षण कक्ष, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था और संस्थान में स्वच्छता की गुणवत्ता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान (UPSIRD), लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में मॉडल संकुल स्तरीय संघ के एमआईएस सहायकों एवं लेखाकारों का 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण बख्शी का तालाब स्थित राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशिक्षण में तेजी

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 18 अगस्त 2026 को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास और महानिदेशक, दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान को प्रशिक्षण व्यवस्था को डिजिटल मासिक एवं त्रैमासिक रोस्टर के अनुरूप संचालित करने के निर्देश दिए थे।

इन निर्देशों के बाद विभाग ने प्रशिक्षण गतिविधियों को गति देते हुए विभिन्न विभागों, संस्थाओं, ग्रामीण विकास से जुड़े कार्मिकों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की है।

तकनीकी और वित्तीय दक्षता बढ़ाना रहा उद्देश्य

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य संकुल स्तरीय संघ के कैडर को तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधन संबंधी कार्यों में दक्ष एवं आत्मनिर्भर बनाना रहा। इससे ग्राम स्तर पर संचालित योजनाओं की निगरानी, क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय विभिन्न कार्यों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। प्रशिक्षण गतिविधियों और प्रतिभागियों की सीखने की क्षमता का नियमित मूल्यांकन किया गया।

वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शी लेखा-जोखा पर जोर

उपायुक्त देवेंद्र कुमार ओझा के अनुसार प्रशिक्षण के दौरान वित्तीय प्रबंधन, त्वरित निर्णय क्षमता, सुदृढ़ ऋण प्रणाली और पारदर्शी हिसाब-किताब रखने की व्यवहारिक जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि उपलब्ध धनराशि का उपयोग सही स्थान और निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अभिलेखों के व्यवस्थित रख-रखाव तथा लेखा-जोखा को पारदर्शी और प्रदर्शनीय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

ग्रामीण महिलाओं में शिक्षा, साक्षरता और जागरूकता बढ़ाने को भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।

मोबाइल एप और पोर्टल पर डेटा एंट्री का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को मोबाइल एप और पोर्टल पर आंकड़ों की प्रविष्टि से लेकर मासिक प्रगति आख्या तैयार करने तक की जानकारी दी गई।

इसके अलावा स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संघ से संबंधित अभिलेखों के ऑनलाइन रख-रखाव, कार्यसूची तैयार करने, सदस्यता पंजिका के संधारण और प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इससे ग्रामीण स्तर पर संचालित गतिविधियों की डिजिटल निगरानी और दस्तावेजीकरण को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

लेखांकन चक्र और ऋण प्रबंधन की दी गई जानकारी

10 दिवसीय प्रशिक्षण में संकुल स्तरीय संघ के दृष्टिकोण एवं उद्देश्यों के साथ सामुदायिक ढांचे और वित्तीय प्रणाली के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिभागियों को लेखांकन चक्र, प्रमुख लेखांकन पुस्तकों, प्राप्ति-भुगतान, आय-व्यय, तुलन पत्र, ऋण प्रबंधन, पोर्टफोलियो प्रबंधन और वित्तीय प्रमुख सूचकांकों की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में वाराणसी, जौनपुर, अलीगढ़ और बलरामपुर से आए लेखाकारों एवं एमआईएस सहायकों ने सक्रिय सहभागिता की।

इन प्रशिक्षकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

प्रशिक्षण के समापन सत्र में राज्य ग्राम्य विकास संस्थान के सहायक निदेशक डॉ. सत्येंद्र गुप्ता की उपस्थिति रही। प्रशिक्षण में श्रीमती साधना रंजन, सुश्री मेघा, सुश्री एकता देवी और श्री अमितेश इंजीनियर ने प्रशिक्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समापन अवसर पर प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इनमें दीपा शुक्ला, रिषा पटेल, चंचल, सोनी, तनु शर्मा, सीमा, जया, ममता, शकीना, हीना, प्रार्थना सिंह, अल्पना, सुमन, नीलू राजभर, प्रिय मिश्रा, हदीशुन निशा, राजकुमारी, अनीता यादव और शिवांगी सहित अन्य प्रतिभागी शामिल रहे।

ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी में मिलेगी मदद

प्रशिक्षण व्यवस्था को डिजिटल रोस्टर से जोड़ने और कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना है। एमआईएस सहायकों और लेखाकारों की तकनीकी तथा वित्तीय दक्षता बढ़ने से स्वयं सहायता समूहों और संकुल स्तरीय संघों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होने की उम्मीद है।

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