आगरा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा हमला, बोले- मीट एक्सपोर्ट में नंबर वन यूपी, गाय को मिले राष्ट्रमाता का दर्जा

सबहेडलाइन: मीट निर्यात, गौ-संरक्षण और संतों के सम्मान के मुद्दे पर यूपी सरकार व भाजपा की नीतियों पर सवाल; मुस्लिम समाज के समर्थन का भी किया दावा

आगरा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने यूपी सरकार, गौ-संरक्षण, मीट एक्सपोर्ट, योगी आदित्यनाथ और भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए। पढ़ें आगरा की पूरी राजनीतिक और धार्मिक खबर।

आगरा। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को आगरा दौरे के दौरान गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग को लेकर जनजागरण अभियान चलाया। शमशाबाद से आगरा नगर पहुंचने पर उनका विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने जनसभाओं और मीडिया से बातचीत में गौ-संरक्षण, सरकार की नीतियों और संत समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

शंकराचार्य ने कहा कि उनकी राष्ट्रव्यापी यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय को विधिक रूप से ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाना है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गौमाता का विशेष महत्व रहा है और इसके संरक्षण के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी विशेष राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि गाय को सम्मानजनक संवैधानिक और कानूनी दर्जा दिलाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए गौ-संरक्षण एक महत्वपूर्ण परीक्षा का विषय है।

शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में गौ-संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि एक ओर सरकार गौ-संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश मीट निर्यात के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने इसे नीतिगत विरोधाभास बताया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को सबसे पहले गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित करने पर विचार करना चाहिए, ताकि इसके संरक्षण के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज लंबे समय से इस मांग को उठाता रहा है।

शंकराचार्य ने दावा किया कि आगरा में मुस्लिम समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का समर्थन किया है। उनके अनुसार, प्रतिनिधियों ने इस संबंध में लिखित समर्थन भी सौंपा।

उन्होंने कहा कि आगामी समय में जनता को ऐसे जनप्रतिनिधियों का समर्थन करना चाहिए जो गौ-संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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