“रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री आवास पहुंचीं स्कूली छात्राओं से योगी आदित्यनाथ ने किया संवाद; बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन के लिए सरकार की योजनाएं गिनाईं, कहा- तकनीक का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करें“
लखनऊ। रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तर प्रदेश की स्कूली छात्राओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राखी बांधकर उनसे संवाद किया। मुख्यमंत्री ने भी छात्राओं की बातें ध्यान से सुनीं और उन्हें जीवन में सफलता के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। संवाद के दौरान स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को सलाह दी कि तकनीक का उपयोग जरूरत और पढ़ाई के लिए करें, लेकिन अनावश्यक स्क्रीन टाइम से बचें और अच्छी किताबें पढ़ने की आदत विकसित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्टफोन आज के समय में उपयोगी साधन है। इसका इस्तेमाल डिजिटल लाइब्रेरी, शैक्षिक सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर मौजूद हर सामग्री उपयोगी नहीं होती। ऐसे में विद्यार्थियों को अपने समय और ध्यान का सही इस्तेमाल करना चाहिए।
छात्राओं ने बांधी राखी, सीएम ने दिए उपहार
रक्षाबंधन पर स्कूली छात्राओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तिलक लगाकर राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने बच्चियों को उपहार के रूप में चॉकलेट और ओडीओपी बैग भेंट किए। एक छात्रा के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने उसकी पॉकेट डायरी पर संदेश भी लिखा।
इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों की छात्राओं ने वीडियो के माध्यम से भी मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। कई छात्राओं ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी आकांक्षाएं, अनुभव और सवाल साझा किए।
‘2017 से पहले बेटियां खुलकर संवाद नहीं कर पाती थीं’
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज मुख्यमंत्री आवास पर बड़ी संख्या में बेटियां बिना किसी भय के उनसे सीधे संवाद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले ऐसी स्थिति नहीं थी कि बेटियां इस तरह सुरक्षित और सहज माहौल में मुख्यमंत्री से मिल सकें और अपनी बात रख सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बेहतर होने से बेटियों के लिए शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर भी बढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बेटियों को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए अनुकूल वातावरण मिले।
स्कूल भेजने को लेकर अभिभावकों की चिंता का किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले कई अभिभावकों के सामने बेटियों को स्कूल भेजना बड़ी चुनौती था। कई परिवार बेटियों की पढ़ाई बीच में ही रोक देते थे या उन्हें घर से दूर दूसरे प्रदेशों के छात्रावासों में रखने के लिए मजबूर होते थे।
उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियों में बदलाव आया है और बेटियां अपने घर के आसपास सुरक्षित वातावरण में शिक्षा हासिल कर रही हैं। सरकार ने बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई योजनाओं को आगे बढ़ाया है।
जन्म से स्नातक तक बेटियों के लिए योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक सहायता के लिए योजनाएं संचालित की हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के जरिए बेटियों को विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता दी जा रही है। छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था भी की गई है।
उन्होंने बताया कि शादी योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से भी पात्र परिवारों को सहायता दी जाती है। इसके अलावा मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्नातक स्तर की 50 हजार मेधावी बेटियों को स्कूटी देने की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में हुआ इजाफा
सीएम योगी ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल में महिला कर्मियों की संख्या भी बढ़ाई गई है। उनके अनुसार, 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 45 हजार हो गई है और जल्द ही 50 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा और अवसर मिलने से बेटियां आज खेल, शिक्षा, प्रशासन और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।
‘यूपी अब बीमारू नहीं, ग्रोथ इंजन बन रहा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का सीधा संबंध प्रदेश के विकास से है। उन्होंने कहा कि कभी बीमारू राज्य के रूप में पहचाने जाने वाला उत्तर प्रदेश अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की बड़ी आबादी को चुनौती मानने के बजाय सरकार ने युवाओं की स्किलिंग, रोजगार और विकास के अवसरों से जोड़ने पर काम किया है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में बदलाव दिखाई दे रहा है।
75 जिलों की छात्राओं ने दी रक्षाबंधन की बधाई
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के 75 जिलों की छात्राओं की वीडियो क्लिप भी प्रदर्शित की गई। छात्राओं ने अपना परिचय देते हुए मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और उन्हें राखी भेजने की बात कही।
कक्षा आठ की शैल कुमारी ने अपने स्कूल में उपलब्ध कंप्यूटर लैब और पढ़ाई की सुविधाओं का जिक्र किया। वहीं, पायनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज की छात्रा समृद्धि वर्मा ने मुख्यमंत्री से आमने-सामने मिलने को अपने लिए खास अवसर बताया।
‘मुझे भी आपके जैसा नेता बनना है’
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय मलिहाबाद की कक्षा नौ की छात्रा वैष्णवी पाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को अपने जीवन का खास अवसर बताया। उसने कहा कि मुख्यमंत्री को टीवी पर देखकर उसके मन में भी उनकी तरह नेता बनने की इच्छा पैदा हुई।
वैष्णवी ने बताया कि वह हॉकी खिलाड़ी है और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हो चुकी है। उसने विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन को भी अपनी प्रगति में महत्वपूर्ण बताया।
इसी विद्यालय की छात्रा दिव्या ने बताया कि अब कक्षा नौ से 12वीं तक पढ़ाई की सुविधा मिलने से वह काफी खुश है। वह फुटबॉल खेलती है और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है। कक्षा सात की अंजावती सिंह ने भी बताया कि वह हॉकी और कराटे में रुचि रखती है और खेल प्रतियोगिताओं में उपलब्धियां हासिल कर चुकी है।
सोशल मीडिया के दौर में छात्राओं ने पूछा सवाल
द संस्कृति स्कूल लखनऊ की छात्राओं ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। कक्षा आठ की श्रेयशी सिंह ने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर सवाल किया। उसने पूछा कि सोशल मीडिया पर अच्छी और खराब दोनों तरह की सामग्री मौजूद है, ऐसे में विद्यार्थी इससे दूरी बनाकर पढ़ाई और अपने लक्ष्य पर ध्यान कैसे केंद्रित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अच्छी सोच और स्पष्ट लक्ष्य जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण समय नष्ट कर सकता है।
‘स्मार्टफोन पर चार से छह घंटे बिताना ठीक नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल पढ़ाई, डिजिटल लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी सामग्री हासिल करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अनावश्यक कंटेंट देखने से बचना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि जो बच्चे रोजाना चार से छह घंटे स्मार्टफोन पर बिताते हैं, उन्हें धीरे-धीरे अपना स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अच्छी और प्रेरणादायी किताबें पढ़ने के साथ-साथ लिखने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया।
‘मैं खुद मुश्किल से आधा घंटा स्मार्टफोन इस्तेमाल करता हूं’
मुख्यमंत्री ने छात्राओं से कहा कि वह स्वयं भी स्मार्टफोन का बहुत सीमित इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि जरूरी सरकारी विषयों या महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित काम के लिए ही वह फोन का इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने छात्राओं को संदेश दिया कि स्मार्टफोन को अपनी दिनचर्या पर हावी न होने दें। पढ़ाई, खेल, रचनात्मक गतिविधियों और किताबों के लिए समय निकालना व्यक्तित्व विकास में अधिक उपयोगी है।
25 करोड़ की आबादी को बताया ताकत
संवाद के दौरान एक छात्रा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि देश में सबसे अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश को वह कैसे संभालते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 25 करोड़ से अधिक आबादी चुनौती नहीं, बल्कि बड़ी संभावना है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं की स्किलिंग, रोजगार और प्रदेश के विकास को आपस में जोड़ने का प्रयास किया है। आबादी को मानव संसाधन और डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में इस्तेमाल करने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिली है।
अटल आवासीय विद्यालयों का भी किया उल्लेख
कार्यक्रम में अटल आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने भी मुख्यमंत्री से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए अटल आवासीय विद्यालय शुरू किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि निर्माण श्रमिकों के माता-पिता काम के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर जाते रहते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। इसी समस्या को देखते हुए प्रदेश में अटल आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था की गई है, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के साथ संवाद के दौरान छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य के लक्ष्य बताए। रक्षाबंधन के इस आयोजन में मुख्यमंत्री ने बेटियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
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