
“विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए चंदौली में जमीन अधिग्रहण तेज हो गया है। 9000 किसानों को नोटिस और 400 से अधिक आपत्तियां मिली हैं। सर्किल रेट व वास्तविक कीमत से मुआवजे पर पेच।“
चंदौली: उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। चंदौली जिले में करीब 9000 किसानों को भूमि अधिग्रहण संबंधी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस मिलने के बाद किसानों की ओर से जमीन के क्षेत्रफल, श्रेणी और मुआवजे के आधार को लेकर आपत्तियां भी दर्ज कराई गई हैं। अब तक 400 से अधिक आपत्तियां सामने आने की जानकारी है।
प्रशासन की ओर से आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती जमीन के मुआवजे की दर तय करने को लेकर सामने आ रही है। कई स्थानों पर जमीन की रजिस्ट्री मौजूदा सर्किल रेट से अधिक कीमत पर होने के कारण अधिकारियों के सामने यह सवाल है कि अधिग्रहण के समय मुआवजे का आधार क्या रखा जाए।
52 गांवों की जमीन होगी प्रभावित
प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए चंदौली तहसील के 46 गांव और पीडीडीयू नगर तहसील के छह गांव प्रभावित होंगे। इन गांवों में एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
प्रक्रिया के तहत किसानों को नोटिस जारी कर उनकी जमीन से संबंधित जानकारी और आपत्तियां मांगी गई हैं। नोटिस के बाद कई किसानों ने भूमि की श्रेणी, क्षेत्रफल और मुआवजे के निर्धारण को लेकर अपनी आपत्तियां प्रशासन के समक्ष दर्ज कराई हैं।
9000 किसानों को भेजे गए नोटिस
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में करीब 9000 किसानों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी है। नोटिस मिलने के बाद अब प्रशासन किसानों की आपत्तियों की सुनवाई और निस्तारण कर रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार, 400 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं। इनमें अधिकांश आपत्तियां भूमि की प्रकृति, क्षेत्रफल और अन्य सामान्य बिंदुओं से संबंधित बताई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सर्किल रेट और वास्तविक कीमत के बीच अंतर बना चुनौती
भूमि अधिग्रहण में सबसे महत्वपूर्ण पेच मुआवजा निर्धारण को लेकर है। जिले के कई हिस्सों में जमीन की रजिस्ट्री मौजूदा सर्किल रेट से अधिक कीमत पर होने की बात सामने आई है।
ऐसे में प्रशासन के सामने यह तय करने की चुनौती है कि अधिग्रहित जमीन का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाए। एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में निर्धारित सर्किल रेट है, वहीं दूसरी तरफ हाल में हुई जमीन की रजिस्ट्री में वास्तविक लेनदेन की कीमत दर्ज है।
अधिकारियों के सामने दोनों दरों के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए मुआवजा निर्धारित करने का विषय है। यही वजह है कि भूमि के मूल्यांकन को लेकर फिलहाल मंथन किया जा रहा है।
अधिग्रहण के दौरान लगातार हो रही रजिस्ट्री
मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया को जटिल बनाने वाला एक अन्य पहलू यह है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान संबंधित क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री भी जारी है। पुराने बैनामों और हाल की रजिस्ट्री में दर्ज कीमतों में अंतर होने पर भूमि के मूल्यांकन में दिक्कत आ सकती है।
प्रशासन को इन सभी पहलुओं का परीक्षण करने के बाद जमीन की दर तय करनी होगी। इसके बाद ही किसानों को मिलने वाले मुआवजे की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
आपत्तियों का निस्तारण जारी
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राजेश कुमार के अनुसार, किसानों की ओर से करीब 400 आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं और लगभग सभी आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया है। उनके मुताबिक, अधिकांश आपत्तियां सामान्य प्रकृति की थीं।
उन्होंने बताया कि भूमि के मूल्य को लेकर मंथन चल रहा है। दर तय होने के बाद मुआवजे की स्थिति स्पष्ट होगी।
किसानों की नजर मुआवजे की दर पर
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ किसानों की नजर अब मुआवजे के निर्धारण पर है। किसानों के लिए जमीन की कीमत का सही आकलन महत्वपूर्ण है, जबकि प्रशासन के सामने निर्धारित नियमों और उपलब्ध भूमि मूल्य संबंधी आंकड़ों के आधार पर दर तय करने की चुनौती है।
विंध्य एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना से जुड़े अगले चरणों में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल प्रशासन आपत्तियों के निस्तारण और भूमि मूल्यांकन की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”





