“कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने 3 मिनी बसें खरीदकर उन्हें ‘हनुमान रथ’ नाम दिया है। अब वे गनर और स्टाफ को साथ बैठाकर खुद बस चला रहे हैं। परिवार ने लग्जरी काफिले की जगह सामूहिक यात्रा की पहल शुरू की है।“
लखनऊ/गोंडा। Brij Bhushan Sharan Singh के सांसद बेटे Karan Bhushan Singh ने वीआईपी काफिले और लग्जरी वाहनों की संस्कृति से अलग हटकर नई पहल की है। सांसद ने तीन मिनी बसें खरीदी हैं, जिनमें गनर, स्टाफ और समर्थकों को साथ बैठाकर खुद वाहन चलाते नजर आए। इन बसों को ‘हनुमान रथ’ नाम दिया गया है।
पर्यावरण और ईंधन बचत का संदेश
देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में सांसद की यह पहल राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
एक साथ कई लोगों के सफर करने से ईंधन की बचत होगी और सड़क पर वाहनों की संख्या भी कम होगी। इससे ट्रैफिक और प्रदूषण पर भी असर पड़ सकता है।
खुद स्टेयरिंग संभाल रहे सांसद

सांसद करण भूषण सिंह कई मौकों पर खुद ‘हनुमान रथ’ चलाते दिखाई दिए। इससे समर्थकों के बीच अलग संदेश गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे फिजूलखर्ची कम होगी और जनता से जुड़ाव भी बढ़ेगा।
बताया जा रहा है कि आने वाले समय में परिवार के अन्य सदस्य भी व्यक्तिगत लग्जरी गाड़ियों की जगह सामूहिक यात्रा मॉडल अपनाएंगे।
बताया जा रहा है कि सांसद करण भूषण सिंह अब क्षेत्रीय दौरों और जनसंपर्क अभियानों के दौरान बड़े लग्जरी काफिले के बजाय सामूहिक यात्रा मॉडल अपनाएंगे। उनके साथ सुरक्षा कर्मी, निजी स्टाफ और कार्यकर्ता एक ही वाहन में सफर करेंगे। इस पहल को फिजूलखर्ची कम करने, ईंधन बचाने और सादगी का संदेश देने से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में Brij Bhushan Sharan Singh और परिवार के अन्य सदस्य भी अपने पारंपरिक लग्जरी काफिलों को सीमित कर सकते हैं। परिवार की ओर से इसे “जनता के बीच सहज पहुंच” और “अनावश्यक वीआईपी संस्कृति खत्म करने” की दिशा में कदम बताया जा रहा है।
सांसद करण भूषण सिंह की मिनी बस चलाते हुए तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। समर्थक इसे सादगी और जमीन से जुड़ी राजनीति का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक संदेश और जनसंपर्क रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
‘हनुमान रथ’ नाम की इन मिनी बसों को धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में भी पेश किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि बसों का इस्तेमाल क्षेत्रीय कार्यक्रमों, गांव दौरों और संगठनात्मक बैठकों में किया जाएगा, ताकि कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सीधा संवाद मजबूत हो सके।
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