“ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 3 मई से गोरखपुर से 81 दिन की गोविष्ट यात्रा शुरू करेंगे। यात्रा में सैकड़ों गाड़ियों का काफिला शामिल होगा। प्रशासन से अभी तक अनुमति नहीं मिली है।“
गोरखपुर। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 3 मई से गोरखपुर से 81 दिन की ‘गोविष्ट यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। यह यात्रा गोमाता संरक्षण, सनातन स्वाभिमान और जनजागरण के उद्देश्य से निकाली जाएगी। हालांकि आयोजकों का कहना है कि प्रशासन को अनुमति के लिए आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली है।
यात्रा को लेकर गोरखपुर और आसपास के जिलों में राजनीतिक व धार्मिक हलचल तेज हो गई है।
गोरक्षपीठ नगरी से होगा शुभारंभ
आयोजकों के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 2 मई को गोरखपुर पहुंचेंगे और सहारा स्टेट परिसर स्थित भारत माता मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे।
इसके बाद 3 मई को गोरक्षपीठ नगरी से यात्रा का औपचारिक शुभारंभ होगा।
81 दिन तक चलेगा अभियान
यात्रा कुल 81 दिनों तक चलेगी। इस दौरान प्रतिदिन पांच विधानसभा क्षेत्रों में गोष्ठी, आशीर्वचन, पादुका पूजन और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आयोजकों का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य लोगों को गोसंरक्षण के प्रति जागरूक करना और समाज को एकजुट करना है।
सैकड़ों गाड़ियों का रहेगा काफिला
यात्रा में सैकड़ों वाहनों का काफिला शामिल होने की बात कही जा रही है। इसमें संत, धर्मानुयायी, सामाजिक कार्यकर्ता और कानूनविद भी शामिल होंगे।
इस बड़े काफिले को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी तैयारी की जा रही है।
यह रहेगा पहला दिन का रूट
पहले दिन यात्रा सहारा स्टेट से निकलकर सहजनवा, खजनी, बांसगांव, चिल्लूपार और चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।
रात्रि विश्राम चौरी चौरा क्षेत्र में होगा। इसके बाद अगले दिन यात्रा कुशीनगर की ओर बढ़ेगी।
आयोजकों ने अनुमति न मिलने पर जताई नाराजगी
स्वामी जी के शिष्य एडवोकेट मनीष पांडेय ने कहा कि प्रशासन से अनुमति मांगी गई है, लेकिन अब तक केवल पूछताछ और जांच हो रही है, कोई स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश भर से लोगों के फोन आ रहे हैं और विभिन्न एजेंसियां भी जानकारी ले रही हैं।
मतदान से जवाब देने की चेतावनी
आयोजकों ने कहा कि यदि सरकार गोमाता संरक्षण के मुद्दे पर गंभीर कदम नहीं उठाती है, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से मतदान के माध्यम से जवाब देगी।
यह बयान यात्रा को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक-राजनीतिक महत्व भी देता है।
प्रशासन की नजरें यात्रा पर
चूंकि यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के शामिल होने की संभावना है, इसलिए प्रशासन की नजरें इस कार्यक्रम पर टिकी हैं। अनुमति मिलने या न मिलने को लेकर दिनभर चर्चाएं जारी रहीं।
अब सभी की नजर 3 मई पर है, जब यह यात्रा प्रस्तावित रूप से शुरू होनी है।
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