आयुर्वेद को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर बढ़ाएं: केशव प्रसाद मौर्य

केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में 11वें आयुर्वेद दिवस पर आयुर्वेद को आधुनिक अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया। आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल भी लॉन्च हुआ।

लखनऊ, 23 सितंबर। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी, यूनानी सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की स्वस्थ भारत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।

उप मुख्यमंत्री बुधवार को गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मर्करी हॉल में 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी को आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय चिकित्सा परंपरा के विस्तार और इसे आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया।

आयुर्वेद के प्रति बढ़ रहा लोगों का विश्वास

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा और आयुर्वेद का महत्व लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। आयुर्वेद को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने के लिए अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। इस विश्वास को और मजबूत करने के लिए चिकित्सा पद्धतियों की प्रमाणिकता और वैज्ञानिक अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

‘एलोपैथी के विरोधी नहीं, सभी पद्धतियों में समन्वय जरूरी’

डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि वह एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार प्रत्येक चिकित्सा पद्धति की अपनी उपयोगिता है। आवश्यकता इस बात की है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय और ज्ञान का आदान-प्रदान हो।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगी जानकारी व्यापक स्तर पर उपलब्ध होने से मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं।

हर जिले में आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं पर जोर

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘एक जनपद-एक मेडिकल कॉलेज’ की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी तरह प्रत्येक जनपद में आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी आगे बढ़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि देश में आयुर्वेद के क्षेत्र में उच्च स्तरीय संस्थानों का विकास हो रहा है। इससे भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।

तीन पद्मश्री विभूतियों का अभिनंदन

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री प्रोफेसर मनोरंजन साहू, पद्मश्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह और पद्मश्री प्रोफेसर केके ठकराल का अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा कि एक ही मंच पर तीन पद्मश्री सम्मानित विभूतियों की उपस्थिति गौरव की बात है। उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

योग की वैश्विक स्वीकार्यता का किया उल्लेख

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा हजारों वर्षों से भारत की जीवन पद्धति का हिस्सा रही है। आज पूरी दुनिया योग को स्वीकार कर रही है और 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाना भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा और स्वास्थ्य से जुड़ा ज्ञान केवल भारत तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका लाभ दुनिया की बड़ी आबादी तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी काम किया जाना चाहिए।

‘श्री अन्न’ और पारंपरिक खान-पान को बताया महत्वपूर्ण

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत में परंपरागत रूप से उपलब्ध मोटे अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का महत्व आज पूरी दुनिया समझ रही है। जिस भोजन को पहले सामान्य आहार माना जाता था, वही आज ‘श्री अन्न’ और मिलेट्स के रूप में स्वास्थ्यवर्धक आहार के तौर पर वैश्विक स्तर पर चर्चा में है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी ज्ञान परंपरा को समझना और अपनाना आवश्यक है।

विद्यार्थियों से अनुसंधान और नवाचार बढ़ाने का आह्वान

डिप्टी सीएम ने आयुर्वेद के विद्यार्थियों और भावी चिकित्सकों से आत्मविश्वास के साथ अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के साथ स्वस्थ भारत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश का संकल्प भी पूरा करना है।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े विद्यार्थी, चिकित्सक, शिक्षक और शोधकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना पर आधारित है भारतीय चिकित्सा परंपरा

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत की संस्कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की भावना पर आधारित है। भारतीय चिकित्सा परंपरा का उद्देश्य केवल देश के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना भी है।

उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी को भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के ज्ञान और अनुभव से लाभान्वित करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री और राज्य मंत्री आयुष दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने पद्मश्री सम्मानित विभूतियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया। इसके साथ ही योग कार्यक्रम, प्रतियोगिताओं, जनपदों और चिकित्सकों को सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।

इस अवसर पर आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल का भी शुभारंभ किया गया।

आयुर्वेद दिवस की थीम पर राज्य मंत्री ने दिया जोर

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सभी को संकल्प लेना चाहिए कि स्वस्थ जीवनशैली का संदेश प्रत्येक परिवार तक पहुंचाया जाए। बच्चों और युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के साथ सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में योगदान देना होगा।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ इस बात पर विचार करने का अवसर देती है कि प्राचीन चिकित्सा परंपराओं, आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नवीनतम स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के समन्वय से लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं कैसे उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

आयुर्वेद को समग्र स्वास्थ्य पद्धति के रूप में बताया

प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने कहा कि आयुर्वेद दिवस केवल एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति के उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि ऐसी समग्र स्वास्थ्य पद्धति के सम्मान का दिन है, जो शरीर और मन के साथ जीवनशैली एवं पर्यावरण को भी स्वास्थ्य का आधार मानती है।

उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा के विस्तार के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों और विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी।

आधुनिक तकनीक और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं के अनुसार आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान संपदा को वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ आगे बढ़ाने से इसके उपयोग और स्वीकार्यता के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आयुर्वेद केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि स्वस्थ भविष्य की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली चिकित्सा परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और आधुनिक संदर्भों में विकसित करना सभी की जिम्मेदारी है।

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