EVM पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान, बोले- सभी सीटें जीत जाएं तब भी बैलेट पेपर के पक्ष में; मायावती ने भी उठाए सवाल

UP EVM Row: अखिलेश यादव ने कहा कि सपा चुनाव में सभी सीटें जीत जाए तब भी वह EVM के खिलाफ हैं। मायावती ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। जानिए दोनों नेताओं ने EVM और VVPAT को लेकर क्या कहा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले EVM को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। अखिलेश यादव ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी चुनाव में सभी सीटें भी जीत जाए, तब भी वह EVM के खिलाफ रहेंगे। वहीं मायावती ने भी EVM को लेकर सवाल उठाते हुए चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग की है।

अखिलेश बोले- जीत से EVM पर रुख नहीं बदलेगा

अखिलेश यादव ने EVM पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का विरोध चुनावी परिणाम से जुड़ा हुआ नहीं है। उनके मुताबिक, अगर सपा सभी सीटों पर जीत भी हासिल कर ले, तब भी वह EVM के खिलाफ रहेंगे।

सपा प्रमुख ने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब कुछ देशों में चुनाव के लिए कागजी मतपत्र का इस्तेमाल किया जाता है तो भारत में इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के इस्तेमाल पर इतना जोर क्यों है। उन्होंने अमेरिका और जर्मनी का भी संदर्भ दिया।

जर्मनी का दिया उदाहरण

अखिलेश यादव ने जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह तकनीक और शोध के क्षेत्र में आगे है, लेकिन वहां संसदीय चुनाव में मतदाता बैलेट पेपर के जरिए मतदान करते हैं। जर्मन बुंडेस्टाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वहां संघीय चुनाव में मतदाता बैलेट पेपर पर अपनी पसंद दर्ज करते हैं और उसे मतपेटी में डालते हैं।

हालांकि, अलग-अलग देशों की चुनाव प्रणालियां उनके अपने कानूनों और संस्थागत व्यवस्थाओं के अनुसार संचालित होती हैं। इसलिए केवल किसी दूसरे देश में बैलेट पेपर के इस्तेमाल के आधार पर भारत की चुनाव प्रणाली में बदलाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

मायावती ने भी बैलेट पेपर की मांग उठाई

बसपा प्रमुख मायावती ने भी सोमवार को EVM को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने नगीना लोकसभा सीट का उदाहरण देते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और देश में चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग की। मायावती ने कहा कि मतदाताओं के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह पैदा नहीं होना चाहिए और निर्वाचन आयोग को उठ रहे सवालों का समय रहते जवाब देना चाहिए।

मायावती ने VVPAT व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि यदि मशीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं तो मतदाता को यह भरोसा कैसे दिलाया जाएगा कि उसका वोट सही तरीके से दर्ज और गिना गया है।

EVM के साथ VVPAT व्यवस्था क्या है?

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान के दौरान EVM के साथ VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। आयोग की जानकारी के मुताबिक मतदाता जब EVM पर उम्मीदवार के सामने बटन दबाता है, तो VVPAT की पारदर्शी विंडो में संबंधित उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न वाली पर्ची करीब सात सेकंड तक दिखाई देती है, जिसके बाद वह सीलबंद बॉक्स में गिर जाती है।

निर्वाचन आयोग EVM और VVPAT को चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने वाली व्यवस्था बताता है। आयोग के अनुसार मतदान से पहले EVM और VVPAT की जांच भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है।

EVM पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी रहा है चर्चा में

EVM को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं और बहस हो चुकी हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से उपलब्ध कानूनी इतिहास के दस्तावेज में 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख है, जिसमें अदालत ने EVM के इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार करते हुए मौजूदा व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं किया था।

इसलिए मौजूदा राजनीतिक बहस में एक ओर विपक्षी दल EVM और VVPAT को लेकर अपनी आशंकाएं तथा बैलेट पेपर की मांग रख रहे हैं, जबकि निर्वाचन आयोग EVM-VVPAT प्रणाली को निर्धारित तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया के तहत संचालित व्यवस्था बताता है।

SIR के बाद EVM बना नया राजनीतिक मुद्दा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले EVM का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच बहस चल रही है। अखिलेश यादव और मायावती दोनों ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता के भरोसे से जुड़े सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव से जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि सपा ने भाजपा को हराने की रणनीति तैयार कर ली है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को हटाए बिना संस्थाओं में बदलाव की बात आगे नहीं बढ़ सकती।

आने वाले चुनाव से पहले बढ़ सकती है बहस

EVM और बैलेट पेपर का मुद्दा अब उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी प्रमुख चर्चा का विषय बनता जा रहा है। सपा और बसपा की ओर से बैलेट पेपर की मांग के बीच निर्वाचन आयोग की मौजूदा EVM-VVPAT व्यवस्था और उसकी प्रक्रियाओं को लेकर राजनीतिक दलों के अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।

ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले EVM, VVPAT, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं।

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