“लखनऊ में गायत्री परिवार की शिक्षक कार्यशाला में सीएम योगी आदित्यनाथ ने जाति-क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लिए कर्तव्य पर जोर दिया।“
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि देश को जाति, क्षेत्र और अन्य आधारों पर बांटने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे समाज को एकजुट करने और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ होना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ लखनऊ के आशियाना स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
‘बिखरा और जातीय खेमों में बंटा भारत नहीं चाहिए’
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को यह विचार करना होगा कि वह किस प्रकार के भारत का निर्माण करना चाहता है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसा भारत नहीं चाहिए जो अलग-अलग जातीय खेमों में बंटकर आपस में संघर्ष करे, बल्कि सभी को मिलकर एकजुट भारत के निर्माण के लिए काम करना चाहिए।
योगी ने कहा कि उनके अनुसार गुलामी के दौर में भी समाज को जोड़ने और बांटने वाली अलग-अलग प्रवृत्तियां सक्रिय थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कुछ तत्व जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास करते हैं।
मुख्यमंत्री ने इसे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के लिए चुनौती बताते हुए शिक्षकों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र के सामने इस तरह की चुनौती हो तो शिक्षक समाज की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
शिक्षक समाज की चेतना और युग निर्माता : योगी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने का काम नहीं करता, बल्कि वह समाज की चेतना को दिशा देने और नई पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक जागरूक होकर अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करे तो भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
उन्होंने भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों का उदाहरण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुकुल परंपरा से चाणक्य, चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ और भगवान श्रीराम जैसे व्यक्तित्वों के निर्माण की परंपरा जुड़ी रही है।
2047 तक विकसित भारत के लिए कर्तव्य पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सामने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य है। इसके लिए लोगों को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने, अपनी विरासत पर गर्व करने, सामाजिक समता के लिए काम करने और नागरिक कर्तव्यों को समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जब नागरिक अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी प्राथमिकता देंगे, तभी देश की सामूहिक शक्ति मजबूत होगी। योगी ने ‘इदम न मम’ की भावना से आगे बढ़कर ‘इदम राष्ट्राय स्वाहा’ का भाव अपनाने की बात कही।
योग के जरिए दुनिया तक पहुंची भारतीय परंपरा
योगी आदित्यनाथ ने योग दिवस का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से भारतीय योग परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि 21 जून को दुनिया के करीब 190 देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना भारतीय ऋषि परंपरा के प्रति वैश्विक रुचि को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा पर गर्व करते हुए दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार होना चाहिए।
नदियों के संरक्षण को बताया जरूरी
मुख्यमंत्री ने नदियों के संरक्षण को भी सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि नदियों का प्रदूषण बड़ी चुनौती है और नदियों के अस्तित्व से मानव जीवन सीधे जुड़ा हुआ है।
उन्होंने नदियों को शरीर की धमनियों के समान बताते हुए उन्हें अविरल और निर्मल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने एक सूख चुकी नदी को सैटेलाइट मैपिंग और खुदाई के माध्यम से पुनर्जीवित किए जाने का उदाहरण भी दिया।
परिवारों को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका बढ़ी
योगी ने कहा कि पहले संसाधन सीमित होने के बावजूद संयुक्त परिवार सामाजिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार थे। परिवार के सदस्य सुख-दुख और संकट में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। उन्होंने कहा कि बदलते समय में परिवार छोटे हुए हैं और कई जगह एक ही घर में रहने के बावजूद लोगों के बीच दूरी बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे दौर में परिवार और समाज को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका बढ़ जाती है। उन्होंने बच्चों में संस्कार विकसित करने के लिए गायत्री परिवार के प्रयासों का उल्लेख किया।
‘व्यक्ति से नहीं, विचार से संगठन की पहचान’
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी संगठन की स्थायी पहचान किसी एक व्यक्ति से नहीं बल्कि उसके विचार और उद्देश्य से बनती है। उन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार को विचार आधारित संगठन का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि समय के साथ संस्थाओं को तकनीक और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप अपने विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के तरीके विकसित करने चाहिए।
11 लाख से अधिक छात्र प्रतियोगिता से जुड़े
मुख्यमंत्री ने बताया कि गायत्री परिवार की ओर से युवाओं के लिए आयोजित प्रतियोगिता में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि युवाओं को सही दिशा देना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने कार्यशाला में मिले मार्गदर्शन को निश्चित समय सीमा के भीतर जमीन पर उतारने की अपील भी की।
दस स्कूलों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के दस स्कूलों को सम्मानित किया। इनमें सीतापुर का सीता इंटर कॉलेज, रायबरेली का चंद्रशेखर एम. पब्लिक स्कूल, लखनऊ का लखनऊ पब्लिक स्कूल, गाजियाबाद का डॉ. केएन मोदी विज्ञान इंटर कॉलेज, अमेठी का श्री सूर्यप्रताप इंटर कॉलेज, बुलंदशहर का अमर सिंह इंटर कॉलेज, चित्रकूट इंटर कॉलेज, सीतापुर का आशुतोष बृज मोहन लाल इंटर कॉलेज, मुजफ्फरनगर का एमजी पब्लिक स्कूल और लखनऊ का सिटी मॉन्टेसरी स्कूल शामिल रहे।
चिन्मय पंड्या ने आंतरिक बुराइयों को बताया चुनौती
कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि आज की चुनौतियां केवल बाहरी नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के भीतर मौजूद स्वार्थ, संकीर्णता, क्रोध, लोभ और असंतोष भी समाज के सामने बड़ी चुनौती हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिक सुविधाएं बढ़ने के बावजूद तनाव और बेचैनी जैसी समस्याएं दिखाई दे रही हैं। उनके अनुसार समाज में सकारात्मक मूल्यों और नैतिक चेतना को मजबूत करने की जरूरत है।
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