यूपी में सरकारी अस्पतालों की 14 बैच दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल, दो दवा कंपनियां तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

“उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की आयरन-फोलिक एसिड और उल्टी रोकने वाली दवाओं के 14 बैच गुणवत्ता जांच में फेल। यूपीएमएससीएल ने दो कंपनियों को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर भुगतान रोका।“

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं की गुणवत्ता जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। आयरन-फोलिक एसिड और उल्टी रोकने वाली दवाओं के कुल 14 बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमएससीएल) ने संबंधित दोनों दवा कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। राजस्थान की बायोजेनेटिक ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड और उत्तराखंड की मैक्सकेम फार्मास्यूटिकल्स को तीन-तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। साथ ही कंपनियों का भुगतान भी रोक दिया गया है।

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए की गई जांच में सामने आई इन खामियों के बाद स्वास्थ्य महकमे में दवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। खास बात यह है कि आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों के नमूनों की दोबारा जांच कराई गई थी, लेकिन उसमें भी खामियां दूर नहीं हुईं।

आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों के 10 बैच फेल

बायोजेनेटिक ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड को बच्चों और महिलाओं के लिए उपयोगी आयरन एवं फोलिक एसिड युक्त गोलियों की आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई थी। इन दवाओं के कुल 10 बैच गुणवत्ता जांच में मानक विहीन पाए गए।

यूपीएमएससीएल की प्रबंध निदेशक जे रीभा के अनुसार, आयरन-फोलिक एसिड टैबलेट के नमूनों की शुरुआती जांच में खामियां सामने आई थीं। इसके बाद इन नमूनों की दोबारा जांच कराई गई। पुनः जांच में भी सभी 10 बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

गुणवत्ता जांच में विफल पाए गए बैचों के नंबर 410424-बीयूपी 25, 150424-बीयूपी 25, 370424-बीयूपी 25, 320424-बीयूपी 25, 360424-बीयूपी 25, 420424-बीयूपी 25, 450424-बीयूपी 25, 490424-बीयूपी 25, 480424-बीयूपी 25 और 270424-बीयूपी 25 हैं।

उल्टी रोकने वाली दवा के चार बैच भी जांच में फेल

दूसरी कार्रवाई उत्तराखंड की मैक्सकेम फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ की गई है। कंपनी की ओर से सरकारी अस्पतालों के लिए आपूर्ति की गई ओन्डैनसेट्रान एचसीएल-4 एमजी टैबलेट के चार बैच गुणवत्ता जांच में विफल पाए गए।

यह दवा उल्टी रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है। जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवा के बैच नंबर यूटी-24002, यूटी-24072, यूटी-2024006 और यूटी-2024009 हैं।

दवा की गुणवत्ता को लेकर संबंधित कंपनी को जनवरी और जून में नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, कंपनी की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद यूपीएमएससीएल ने कंपनी को भी तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया। इसके साथ ही भुगतान रोकने की कार्रवाई भी की गई।

तीन साल तक सरकारी आपूर्ति से बाहर रहेंगी कंपनियां

दोनों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने का मतलब है कि निर्धारित अवधि के दौरान वे यूपीएमएससीएल के माध्यम से संबंधित सरकारी दवा आपूर्ति व्यवस्था में शामिल नहीं हो सकेंगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और निर्धारित मानकों का पालन कराना है।

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में मरीजों के उपचार में किया जाता है। ऐसे में गुणवत्ता जांच में खामियां मिलने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक है।

गुणवत्ता जांच और निगरानी पर जोर

इस मामले में आयरन-फोलिक एसिड टैबलेट के नमूनों की दोबारा जांच में भी खामियां मिलने से गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया का महत्व सामने आया है। वहीं, ओन्डैनसेट्रान टैबलेट के मामले में नोटिस जारी किए जाने के बाद कंपनी के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।

यूपीएमएससीएल की कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीद और आपूर्ति में गुणवत्ता मानकों को लेकर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संबंधित दवाओं के कितने पैकेट या कितनी मात्रा अस्पतालों तक पहुंची थी और मरीजों को इनका वितरण हुआ था या नहीं। इस संबंध में अलग से आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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