
नई दिल्ली : भारतीय सेना ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे एक दावे का फैक्ट चेक जारी कर उसे खारिज किया। सेना के मुताबिक, पाकिस्तान से जुड़े एक प्रोपेगेंडा अकाउंट ने दावा किया था कि 23 अक्टूबर की सुबह भारतीय सेना ने कथित तौर पर एक समूह के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें सात युवा घायल हो गए और दो लोगों की मौत हो गई। सेना ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हुए एक पुराने घटनाक्रम से जुड़ी है।
भारतीय सेना ने क्या कहा?
भारतीय सेना ने अपने फैक्ट चेक में कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट में दक्षिण दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों की एक पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। सेना के अनुसार, इस तस्वीर को गलत संदर्भ में पेश कर रक्षा बलों की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना द्वारा युवाओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने और इस घटना में लोगों के घायल होने या मारे जाने के दावे भ्रामक हैं। सेना ने सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को बिना पुष्टि के साझा करने से बचने की अपील की।

कब का है वायरल वीडियो?
भारतीय सेना के मुताबिक, वायरल तस्वीर या वीडियो 17 अक्टूबर की घटना से संबंधित है। उस दिन जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के दौरान सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। सेना ने कहा कि उस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थी।
जामिया में छात्र संघ के गठन को लेकर समिति गठित
इस बीच, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित की है। यह कदम जामिया मिलिया इस्लामिया अधिनियम, 1988 की धारा 23(J) और 23(K) के तहत उठाया गया है।
अधिकारी के अनुसार, समिति वर्ष 2006 में छात्र संघ के भंग होने के कारणों, इस मामले से जुड़े अदालती फैसलों और लिंगदोह समिति की 2007 की सिफारिशों पर विचार करेगी।
दो दशक बाद छात्र संघ के मुद्दे की समीक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन के बयान के मुताबिक, जामिया में छात्र संघ को आखिरी बार 2006 में भंग किया गया था। इसके बाद से कानूनी और संस्थागत परिस्थितियों में कई बदलाव हुए हैं। ऐसे में छात्र संघ के गठन से जुड़े मुद्दे की मौजूदा कानूनी व्यवस्था और संस्थागत ढांचे के आधार पर दोबारा समीक्षा की जा रही है।
विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति छात्र संघ के संविधान और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगी।








