“भोजपुर भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ी कार्रवाई हुई है। पहली गोली चलाने के आरोपी STF जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। जानिए Bihar STF Encounter Case, जांच और परिवार की मांग से जुड़ी पूरी जानकारी।“
आरा (भोजपुर): बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एनकाउंटर के दौरान पहली गोली चलाने के आरोपी एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच और मोबाइल सर्विलांस की मदद से गुरुवार देर रात उसे पकड़ा गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी जवान लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और लगातार ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
STF जवान अक्षय कुमार पर लगा पहली गोली चलाने का आरोप
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में मृतक के परिवार ने आरोप लगाया था कि STF जवान अक्षय कुमार ने सबसे पहले गोली चलाई थी।
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने दावा किया था कि उन्होंने अपनी आंखों से अक्षय कुमार को पहली गोली चलाते हुए देखा था। इसी आरोप के आधार पर परिवार लगातार आरोपी जवान की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था।
मुख्यमंत्री से मिले थे भरत तिवारी के परिजन
गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की थी।
परिवार ने आरोप लगाया था कि एनकाउंटर की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री की ओर से परिवार को उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया था।
पहले ही निलंबित हो चुका था STF जवान
अक्षय कुमार STF की SOG टीम में तैनात था। मामले में उसकी सरकारी पिस्टल पहले ही जब्त की जा चुकी थी। पुलिस के अनुसार, उसे पहले निलंबित भी किया गया था।
निलंबन के बाद से वह कथित तौर पर जांच में उपस्थित नहीं हो रहा था। अब गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है।
मां के बयान पर दर्ज हुई थी FIR
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में 22 जून को मृतक की मां आशा देवी के बयान पर शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
एफआईआर में तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत कई पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था।
मामले में हत्या, आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।
आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का आरोप
परिवार की ओर से दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 17 जून की सुबह पुलिस अधिकारी भरत भूषण तिवारी को उनके घर से अपने साथ ले गए थे।
परिजनों का आरोप है कि इसके बाद हुई कार्रवाई में एनकाउंटर की कहानी संदिग्ध है और भरत तिवारी को आत्मसमर्पण के बाद गोली मारी गई। हालांकि मामले की जांच न्यायिक आयोग कर रहा है और जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
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