मातृभूमि की रक्षा ही हमारा सर्वोच्च धर्म है: प्रो. आर.एन. त्रिपाठी

बीएचयू के शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, धरती और मातृभूमि की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य

काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में सामाजिक विज्ञान संकाय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. आर.एन. त्रिपाठी ने शोध छात्रों को मातृभूमि और मिट्टी के महत्व पर संबोधित करते हुए कहा कि जीवन का आधार धरती और मातृभूमि ही है।

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में समाजशास्त्र विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. आर.एन. त्रिपाठी ने शोध छात्रों को संबोधित करते हुए मातृभूमि और माटी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक प्रकार के वैभव और संसाधन प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन यदि भोजन ही उपलब्ध न हो तो उन सभी का कोई महत्व नहीं रह जाता। भोजन का मूल स्रोत हमारी धरती और उसकी उर्वर मिट्टी है, इसलिए मातृभूमि का महत्व सर्वोपरि है।

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि यही वह धरती है जहां हम सभी ने जन्म लिया है, हमारा पालन-पोषण हुआ है और हमारी सांस्कृतिक पहचान विकसित हुई है। यदि मातृभूमि ही सुरक्षित न रहे तो मानव जीवन और समाज की कल्पना भी अधूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का अपनी जन्मभूमि और मिट्टी से गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध होता है।

उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि मातृभूमि के प्रति अनुराग और लगाव का भाव इतना स्वाभाविक है कि लंका विजय के बाद भगवान राम के अनुज लक्ष्मण भी इस भाव से अछूते नहीं रहे। यह भावना हर व्यक्ति के भीतर स्वाभाविक रूप से विद्यमान रहती है और उसे अपनी जन्मभूमि से जोड़े रखती है।

मुख्य वक्ता ने कहा कि जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपनी माता की रक्षा और सम्मान को अपना कर्तव्य मानता है, उसी प्रकार मातृभूमि की रक्षा करना भी हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने युवाओं और शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्र, समाज और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करें तथा मातृभूमि की सुरक्षा और सम्मान के लिए सदैव तत्पर रहें।

कार्यक्रम में उपस्थित शोधार्थियों ने भी विषय पर अपने विचार साझा किए और मातृभूमि, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना था।

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