AAP में बगावत के बीच BSP सख्त, जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर अशोक बाहर

जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर अशोक पर गिरी गाज, पंजाब कनेक्शन और अनुशासन का सख्त संदेश

मायावती ने BSP से जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर अशोक को बाहर कर दिया। पंजाब कनेक्शन और पार्टी अनुशासन को लेकर लिया गया सख्त फैसला।

लखनऊ। देश की राजनीति में उथल-पुथल के बीच एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी में बगावत की खबरें सामने आई हैं, वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बड़ा कदम उठाते हुए दो वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने 24 घंटे के भीतर जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर अशोक को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

AAP संकट के बीच BSP का सख्त संदेश
राजनीतिक हलकों में यह कार्रवाई उस समय हुई है जब आम आदमी पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर असंतोष और टूट की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच BSP का यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है निष्कासन की वजह?
जयप्रकाश सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि हाल ही में वह पंजाब गए थे और वहां ऐसे नेता से मुलाकात की, जो BSP विधायक के विरोध में रहा है। इस मामले की शिकायत पार्टी नेतृत्व तक पहुंची, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
धर्मवीर अशोक, जिन्हें जयप्रकाश सिंह का करीबी माना जाता है, को भी इसी क्रम में पार्टी से बाहर कर दिया गया।

जयप्रकाश सिंह और धर्मवीर अशोक पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप

पंजाब कनेक्शन ने बढ़ाई गंभीरता
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस पूरे मामले का सीधा संबंध पंजाब की राजनीति से जुड़ा है। BSP के एकमात्र विधायक के विरोधी नेता से संपर्क और पार्टी लाइन से हटकर गतिविधियां करना नेतृत्व को नागवार गुजरा।

अंबेडकर जयंती कार्यक्रम भी बना कारण
बताया जा रहा है कि 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर दोनों नेता अलग-अलग जिलों में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हुए, जहां अन्य दलों के नेता भी मंच साझा कर रहे थे। इसे भी पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना गया।

चुनावी रणनीति का हिस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए मायावती कोई भी ढिलाई नहीं बरतना चाहतीं। यह कार्रवाई पार्टी कैडर को साफ संदेश देती है कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस घटनाक्रम से साफ है कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच BSP अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने में जुटी है, जबकि दूसरी ओर AAP के अंदरूनी संकट ने राष्ट्रीय राजनीति का माहौल और गरमा दिया है।

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