फेसबुक-इंस्टाग्राम पर फर्जी सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगी, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

“गृह मंत्रालय ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डीपफेक वीडियो से सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को लेकर चेताया। जानें बचाव के तरीके और शिकायत नंबर 1930।“

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगने के मामले में गृह मंत्रालय (MHA) ने चेतावनी जारी की है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चलाए जा रहे भ्रामक विज्ञापनों के जरिए जालसाज प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और मुख्यमंत्रियों सहित कई प्रमुख हस्तियों के फर्जी या डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन विज्ञापनों में लोगों को वित्तीय सहायता, सरकारी लाभ और इनाम दिलाने का लालच दिया जाता है।

गृह मंत्रालय की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) की एडवाइजरी के मुताबिक, ठग वादा किए गए लाभ को जारी करने के नाम पर लोगों से टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज और वेरिफिकेशन फीस जैसी रकम मांगते हैं। कई बार पीड़ितों से बार-बार भुगतान कराया जाता है, लेकिन उन्हें कोई सहायता या इनाम नहीं मिलता।

डीपफेक वीडियो से सरकारी योजना का झांसा

जालसाज सोशल मीडिया विज्ञापनों में सार्वजनिक हस्तियों के वीडियो और आवाज से छेड़छाड़ कर उन्हें इस तरह पेश करते हैं, मानो वे किसी नई सरकारी कल्याणकारी योजना की घोषणा कर रहे हों। विज्ञापनों में दिए गए फोन नंबरों या वेबसाइट लिंक के जरिए लोगों को संपर्क करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

इसके बाद ठग फोन कॉल या व्हाट्सऐप चैट के माध्यम से लोगों से बात करते हैं। कुछ मामलों में दावा किया जाता है कि व्यक्ति को सरकारी आर्थिक सहायता पाने के लिए चुना गया है। रकम जारी करने से पहले अलग-अलग शुल्क जमा करने को कहा जाता है।

नकली स्क्रैच कार्ड और स्पिन-विन से भी ठगी

एडवाइजरी में नकली कैशबैक, स्क्रैच कार्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं के जरिए होने वाली धोखाधड़ी का भी जिक्र है। लोगों को इनाम या कैशबैक मिलने का लालच देकर संदिग्ध वेबसाइटों पर भेजा जाता है। इसके बाद उनसे भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने या UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट मंजूर करने के लिए कहा जाता है।

कुछ मामलों में पीड़ितों को भुगतान ऐप खोलकर UPI PIN दर्ज करने के लिए कहा जाता है। उन्हें लगता है कि इससे इनाम की रकम खाते में आएगी, जबकि वास्तव में वे अपने खाते से पैसे भेजने वाले ट्रांजैक्शन को मंजूरी दे सकते हैं।

+92 नंबर से आने वाली कॉल पर सतर्क रहें

गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल के प्रति भी सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी में विशेष रूप से +92 कंट्री कोड से शुरू होने वाले नंबरों का उल्लेख किया गया है। ऐसे कॉल करने वाले खुद को किसी सार्वजनिक हस्ती या उसके कार्यालय का प्रतिनिधि बताकर आर्थिक सहायता दिलाने का दावा कर सकते हैं।

किसी कॉल करने वाले की पहचान केवल उसके दावे या वीडियो के आधार पर सही न मानें। संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।

साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?

गृह मंत्रालय ने लोगों को सोशल मीडिया पर दिखने वाले सरकारी योजनाओं के विज्ञापनों पर भरोसा करने से पहले उनकी पुष्टि करने की सलाह दी है। किसी भी योजना की जानकारी संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से जांचें। सरकारी सहायता दिलाने के नाम पर मांगी जा रही फीस और भुगतान के उद्देश्य की सावधानीपूर्वक पड़ताल करें।

आधार, PAN, बैंक खाते की जानकारी, OTP और UPI PIN जैसी संवेदनशील जानकारियां अज्ञात लोगों के साथ साझा न करें। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान व्यक्ति के कहने पर भुगतान ऐप में कोई प्रक्रिया पूरी करने से बचें। UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले भुगतान की राशि और प्राप्तकर्ता का नाम ध्यान से जांचें।

याद रखें: UPI PIN पैसे भेजने या भुगतान को मंजूरी देने के लिए इस्तेमाल होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने से पहले पूरी जानकारी पढ़ें।

ठगी होने पर कहां करें शिकायत?

अगर कोई व्यक्ति ऐसी धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है या उसके खाते से संदिग्ध ट्रांजैक्शन होता है, तो उसे बिना देर किए साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

सोशल मीडिया पर दिखने वाले सरकारी विज्ञापनों, वीडियो और इनाम के दावों की पुष्टि करना ही ऐसी ठगी से बचने का सबसे अहम तरीका है।

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