फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे ने रचा इतिहास, नॉकआउट में पहुंचने वाला बना सबसे छोटा देश

FIFA World Cup 2026 में डेब्यू कर रहे केप वर्डे ने इतिहास रचते हुए नॉकआउट राउंड में जगह बना ली है। मात्र पांच लाख आबादी वाला यह देश विश्व कप नॉकआउट में पहुंचने वाला सबसे छोटा राष्ट्र बन गया है। अब उसका मुकाबला अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी की टीम से होगा।

नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 में पहली बार हिस्सा ले रहे केप वर्डे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी दुनिया भर में चर्चा हो रही है। सऊदी अरब के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलने के बाद इस छोटे से अफ्रीकी देश ने ग्रुप-एच में दूसरा स्थान हासिल करते हुए नॉकआउट चरण में प्रवेश कर लिया। इसके साथ ही केप वर्डे विश्व कप के नॉकआउट दौर में पहुंचने वाला सबसे छोटा देश बन गया है।

लगातार तीसरे ड्रॉ ने दिलाया ऐतिहासिक टिकट

केप वर्डे ने ग्रुप चरण के अपने तीनों मुकाबले ड्रॉ खेले। टीम ने पहले मुकाबले में पूर्व विश्व चैंपियन स्पेन को गोलरहित बराबरी पर रोका था, जबकि दूसरे मैच में उरुग्वे के खिलाफ पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए 2-2 से मुकाबला समाप्त किया। तीसरे मैच में सऊदी अरब के खिलाफ 0-0 का परिणाम टीम के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ।

महज पांच लाख आबादी वाले देश ने किया कमाल

अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित द्वीपीय देश केप वर्डे की आबादी लगभग पांच लाख है। सीमित संसाधनों और छोटे खिलाड़ी पूल के बावजूद टीम ने फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहचान बना ली है। विश्व कप के अपने पहले ही अभियान में नॉकआउट तक पहुंचना इस उपलब्धि को और भी खास बना देता है।

बिना कोई मैच हारे नॉकआउट में पहुंची टीम

केप वर्डे विश्व कप के इतिहास में अपने पहले ही टूर्नामेंट में बिना कोई मैच गंवाए नॉकआउट चरण में पहुंचने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि अफ्रीकी फुटबॉल के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

अब मेसी की अर्जेंटीना से होगी अग्निपरीक्षा

राउंड ऑफ-32 में केप वर्डे की भिड़ंत मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना से होगी। भारतीय समयानुसार यह मुकाबला 4 जुलाई को मियामी में सुबह 3:30 बजे खेला जाएगा। फुटबॉल प्रेमियों की नजरें अब इस रोमांचक मुकाबले पर टिकी होंगी कि क्या केप वर्डे अपनी सपनों जैसी यात्रा को आगे भी जारी रख पाता है।

‘छोटे द्वीप, बड़े सपने’ बना टीम का प्रतीक

मैच से पहले टीम के कोच ने कहा था कि सपने देखने का अधिकार सभी को है और फुटबॉल में कुछ भी असंभव नहीं है। खिलाड़ियों ने मैदान पर इस सोच को सच साबित कर दिखाया। स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के हाथों में लिखे “छोटे द्वीप, बड़े सपने” जैसे संदेश इस ऐतिहासिक उपलब्धि की भावना को दर्शाते रहे।

40 वर्षीय गोलकीपर बने टीम की दीवार

केप वर्डे की सफलता में अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा की भूमिका बेहद अहम रही। 40 वर्षीय गोलकीपर ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को कई मौकों पर बचाया और नॉकआउट तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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