“Global Manufacturing Hub: Confederation of Indian Industry ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए पारदर्शी और किफायती औद्योगिक भूमि सुधार जरूरी हैं।“
नई दिल्ली। भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा सुझाव देते हुए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने कहा है कि औद्योगिक भूमि सुधार के बिना यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। संगठन ने अपनी रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि तक किफायती, पारदर्शी और समयबद्ध पहुंच को सबसे अहम बताया है।
“भूमि सुधार के बिना लक्ष्य अधूरा”
CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि मेक इन इंडिया, औद्योगिक कॉरिडोर, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक लॉजिस्टिक्स जैसी योजनाओं के बावजूद, अगर जमीन उपलब्धता में पारदर्शिता नहीं होगी तो भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का सपना अधूरा रह जाएगा।
मौजूदा सिस्टम में क्या समस्याएं?
रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान में कई चुनौतियां हैं:
- जटिल और खंडित प्रक्रियाएं
- अस्पष्ट भूमि स्वामित्व
- कब्जा मिलने में देरी
- आवंटित जमीन का कम उपयोग
इन समस्याओं से निवेश की लागत बढ़ती है और परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं।
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि व्यवस्था को सुधारने के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इसके तहत एक राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक बनाने की बात कही गई है, जो GIS आधारित प्लेटफॉर्म होगा और जमीन की उपलब्धता, जोनिंग, स्वामित्व व पर्यावरणीय स्थिति की रियल टाइम जानकारी देगा।
साथ ही, पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए सिंगल-विंडो डिजिटल सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है, ताकि आवेदन से लेकर आवंटन तक सभी कार्य एक ही प्लेटफॉर्म पर हो सकें।
रिपोर्ट में भूमि आवंटन से लेकर वास्तविक कब्जा मिलने तक समयबद्ध प्रक्रिया तय करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई है, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हो और परियोजनाएं समय पर शुरू हो सकें।
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) का मानना है कि इन प्रस्तावित सुधारों के लागू होने से देश में निवेश और औद्योगिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक भूमि की पारदर्शी और आसान उपलब्धता से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, जिससे नई परियोजनाएं तेजी से शुरू हो सकेंगी। इसके साथ ही उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी और प्रभाव को और मजबूत कर पाएगा।
औद्योगिक भूमि सुधार को लेकर CII की यह रिपोर्ट सरकार के लिए एक रोडमैप की तरह देखी जा रही है। अगर सुझाए गए कदम लागू होते हैं, तो भारत का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का सपना तेजी से साकार हो सकता है।
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