“कानपुर के LLR अस्पताल के डॉक्टरों ने विश्व में पहली बार दिल के थक्के गलाने वाले इंजेक्शन से आंखों की रोशनी वापस लाने का दावा किया है। महिला मरीज की सफल सर्जरी के बाद आंखों की सूजन और दर्द भी कम हो गया। जानें पूरी मेडिकल उपलब्धि।“
कानपुर। एलएलआर अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक अनोखी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने दिल में जमे खून के थक्के गलाने वाले इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया, जिससे एक महिला मरीज की खो चुकी रोशनी वापस लौट आई।
डॉक्टरों का कहना है कि विश्व में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल आंखों की गंभीर बीमारी के इलाज में किया गया है। सफल उपचार के बाद मरीज की आंखों की सूजन और दर्द में भी तेजी से सुधार हुआ।
आंखों की हालत थी बेहद गंभीर
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि जब महिला मरीज अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें बाहर की ओर निकल आई थीं। आंखों में भारी सूजन थी और दर्द असहनीय हो चुका था।
उन्होंने बताया कि मरीज की आंखों का प्रेशर सामान्य से कई गुना अधिक था। शुरुआती इलाज के तहत एंटीबायोटिक और प्रेशर कम करने वाली दवाएं दी गईं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
अल्ट्रासाउंड जांच में पता चला कि आंखों के भीतर खून के थक्के जम गए हैं और स्थिति बेहद गंभीर है।
सर्जरी का समय निकल चुका था
डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी स्थिति में सामान्य तौर पर शुरुआती छह घंटे के भीतर सर्जरी कर थक्के हटाने पड़ते हैं, लेकिन मरीज काफी देर से अस्पताल पहुंची थी। दूसरा विकल्प 15 से 20 दिन तक इंतजार करना था, ताकि थक्के अपने आप खत्म हों और बाद में सर्जरी की जा सके।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने नया प्रयोग करने का फैसला लिया।
दिल के डॉक्टर से ली मदद
डॉ. परवेज खान ने बताया कि उन्होंने डॉ. राकेश वर्मा से संपर्क किया और दिल में जमे खून के थक्कों को गलाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।
इसके बाद टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन और विशेष ‘सुप्रा कोरोडियल नीडल’ तकनीक की मदद से मरीज का इलाज किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक यह इंजेक्शन सामान्य तौर पर हार्ट अटैक और दिल में खून के थक्के गलाने के लिए इस्तेमाल होता है।
डॉ. राकेश वर्मा ने इलाज के लिए महंगा इंजेक्शन नि:शुल्क उपलब्ध कराया, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने तुरंत प्रक्रिया शुरू की।
24 घंटे में दिखा चमत्कारी असर
इलाज के करीब 24 घंटे बाद मरीज की दोबारा जांच की गई तो डॉक्टर भी परिणाम देखकर हैरान रह गए। मरीज का तेज दर्द खत्म हो चुका था और आंखों का प्रेशर सामान्य स्तर पर आ गया था।
सबसे बड़ी बात यह रही कि महिला की चली गई आंखों की रोशनी वापस लौट आई।
‘हेमोरेजिक किसिंग कोरोइड’ जैसे लक्षण
डॉक्टरों ने बताया कि महिला में ‘हेमोरेजिक किसिंग कोरोइड’ नामक गंभीर बीमारी जैसे लक्षण पाए गए थे। इस बीमारी में आंखों के अंदरूनी हिस्से में सूजन और खून के थक्के जम जाते हैं।
आमतौर पर इस बीमारी के इलाज में लंबा समय लगता है, लेकिन LLR अस्पताल की टीम ने नई तकनीक के जरिए मरीज को काफी पहले राहत दिला दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक आगे भी सफल रहती है तो आंखों की गंभीर बीमारियों के इलाज में यह बड़ी मेडिकल उपलब्धि साबित हो सकती है।
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