“KGMU Skull Base Workshop 2026: लखनऊ के KGMU में NSI–BOE द्वारा आयोजित कैडावरिक वर्कशॉप में एडवांस माइक्रोस्कोपिक स्कल बेस सर्जरी की ट्रेनिंग दी गई। देशभर के डॉक्टरों ने लिया हिस्सा।”
लखनऊ।लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करता नजर आया। 25 अप्रैल 2026 को केजीएमयू के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एनाटॉमी विभाग और न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (NSI) – बोर्ड ऑफ एजुकेशन (BOE) के सहयोग से “माइक्रोसकॉपिक स्कल बेस एप्रोच ” विषय पर एक उच्च स्तरीय कैडावरिक वर्कशॉप का सफल आयोजन किया। इस कार्यशाला ने न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञों को उन्नत सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया।

कार्यशाला की अध्यक्षता न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. बी.के. ओझा और एनाटॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. नवनीत चौहान ने संयुक्त रूप से की, जबकि आयोजन सचिव डॉ. अंकुर बजाज ने इसके सफल संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम में कुल 18 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों से आए चिकित्सक शामिल थे। इससे इस वर्कशॉप की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता और महत्व स्पष्ट होता है।
वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों को स्कल बेस सर्जरी की जटिल और अत्याधुनिक तकनीकों—जैसे FTOZ क्रेनियोटॉमी, एक्स्ट्राड्यूरल क्लिनॉइडेक्टॉमी, कैवर्नस साइनस एक्सपोजर और एंटीरियर पेट्रोसेक्टॉमी—का गहन और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण कैडावरिक स्किल लैब में अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ सम्पन्न हुआ, जिससे डॉक्टरों को वास्तविक ऑपरेशन जैसी परिस्थितियों में सीखने का अवसर मिला।

इस कार्यशाला की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसमें छह फ्रेश-फ्रोजन कैडावर का उपयोग किया गया। आमतौर पर ऐसे वर्कशॉप में केवल एक कैडावर पर प्रदर्शन किया जाता है, लेकिन केजीएमयू ने हर प्रतिभागी को व्यक्तिगत रूप से अभ्यास का अवसर देकर प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नई ऊंचाई दी। इसके साथ ही, अमेरिका से विशेष सिलिकॉन डाई मंगाकर कैडावर की धमनियों और शिराओं में इंजेक्ट किया गया, जिससे रक्त वाहिकाएं क्रमशः लाल और नीली दिखाई दीं। इस तकनीक ने प्रशिक्षण को और अधिक वास्तविक और प्रभावी बना दिया।

कैडावर की इस जटिल और वैज्ञानिक तैयारी को कार्यशाला से एक दिन पहले लगभग आठ घंटे की मेहनत के साथ पूरा किया गया, जिसमें डॉ. अंकुर बजाज, कोलकाता के न्यूरोसर्जन डॉ. देबार्शी चटर्जी और रेजिडेंट टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, एनाटॉमी विभाग ने कैडावर की उपलब्धता और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराकर इस आयोजन को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।

केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस अभिनव और उच्च स्तरीय शैक्षणिक पहल की सराहना करते हुए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करते हैं, बल्कि भविष्य के सर्जनों को बेहतर और सुरक्षित उपचार के लिए तैयार भी करते हैं।
कुल मिलाकर, यह वर्कशॉप अपने उच्च शैक्षणिक स्तर, अत्याधुनिक तकनीक और वास्तविक सर्जिकल अनुभव के कारण प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक साबित हुई। केजीएमयू द्वारा आयोजित यह पहल चिकित्सा प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
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