“Lucknow Congress Seminar Women Reservation: लखनऊ में कांग्रेस की संगोष्ठी में महिला आरक्षण कानून को लेकर BJP पर तीखा हमला, नेताओं ने 2023 बिल लागू करने की मांग उठाई।”
लखनऊ। महिला आरक्षण को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। रविवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित संगोष्ठी “महिला आरक्षण अधिनियम: सम्मान या छलावा” में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।
‘आरक्षण पर राजनीति कर रही भाजपा’
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि अविनाश पांडे (राष्ट्रीय महासचिव एवं यूपी प्रभारी) ने कहा कि महिलाएं बराबरी की हकदार हैं, लेकिन भाजपा आरक्षण के मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है।
उन्होंने मांग की कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू किया जाए।

‘महिला सम्मान पर भाजपा की नीयत पर सवाल’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी को सम्मान नहीं दे सका, वह महिलाओं के सम्मान की बात कर रहा है।
उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की नीयत साफ नहीं है।
‘बिल पास, फिर लागू क्यों नहीं?’
मुख्य वक्ता और पूर्व कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय की रूपरेखा वर्मा ने सवाल उठाया कि जब 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है तो उसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन और आरक्षण दो अलग मुद्दे हैं, इन्हें जोड़कर महिलाओं के अधिकार रोके जा रहे हैं।

कांग्रेस ने महिलाओं को दिया नेतृत्व: मोना
नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख किया और भाजपा से पूछा कि क्या वह किसी महिला को प्रधानमंत्री या राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाएगी।
‘हमें देवी नहीं, बराबरी का अधिकार चाहिए’
सामाजिक कार्यकर्ता नाइस हसन ने कहा कि महिलाओं को पूजा नहीं, बल्कि बराबरी का दर्जा और अधिकार चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है और उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।

बड़ी मांग: तुरंत लागू हो महिला आरक्षण
संगोष्ठी में शामिल नेताओं ने एक स्वर में मांग उठाई कि महिला आरक्षण अधिनियम को जल्द लागू किया जाए और महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में वास्तविक हिस्सेदारी दी जाए।
इस कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण और महिला अधिकार बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है।

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