“मौलाना अरशद मदनी बयान विवाद में संत समाज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। वेदांती बोले—देश में मदरसे खुल रहे हैं, मुसलमान विधायक-सांसद हैं, मदनी का दावा गलत है।”
लखनऊ। मौलाना अरशद मदनी बयान विवाद राजनीतिक और धार्मिक जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान पर साधु-संतों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनके आरोपों को निराधार बताया है।
आध्यात्मिक गुरु रामविलास वेदांती ने कहा—
“लगभग सभी राज्यों में मुसलमान विधायक हैं। मुसलमान सांसद हैं। अगर उन्हें दबाया जाता तो वे सांसद नहीं बनते।”
मदनी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जिसमें उन्होंने कहा कि “मुसलमान दबाव में हैं और उन्हें देश में शिक्षा-संस्थानों पर बंदिशें झेलनी पड़ रही हैं”, वेदांती ने कहा कि तथ्य इसके बिल्कुल विपरीत हैं।
“मुसलमान इस देश में मदरसा खोल रहे”—वेदांती
वेदांती ने कहा—
“देश में मुसलमान मदरसे खोल रहे हैं और उन मदरसों पर कोई रोक नहीं लगी है। मौलाना अरशद मदनी गलत बोल रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता देता है। इसलिए मदनी का दावा राजनीतिक भ्रम फैलाने वाला है।
संत समाज ने क्या कहा?
कई संतों ने कहा कि भारत में मुसलमानों को मतदान, शिक्षा और धार्मिक संस्थान चलाने की पूर्ण स्वतंत्रता है।
देश में हज़ारों मदरसे बिना किसी सरकारी रोक के चल रहे हैं।
विधानसभाओं और संसद में मुस्लिम जनप्रतिनिधियों की मजबूत उपस्थिति यह साबित करती है कि किसी तरह का दमन नहीं है।
बयान के राजनीतिक मायने
धार्मिक नेताओं का मानना है कि मौलाना अरशद मदनी का यह बयान राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और इसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल









