“Morocco First Woman PM: फातिमा एज़्ज़हरा अल मंसूरी मोरक्को की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। किंग मोहम्मद VI ने उन्हें नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। PAM ने चुनाव में 97 सीटें जीती हैं।“
रबात। मोरक्को की राजनीति में बुधवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। किंग मोहम्मद VI ने फातिमा एज़्ज़हरा अल मंसूरी को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। 50 वर्षीय अल मंसूरी को नई सरकार के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी पार्टी ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी (PAM) ने हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में सबसे अधिक सीटें हासिल की हैं।
संसदीय चुनाव में PAM को मिली 97 सीटें
मोरक्को में 23 सितंबर को हुए संसदीय चुनाव के अंतिम परिणामों में PAM ने 395 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 97 सीटें जीतीं। हालांकि पार्टी स्पष्ट बहुमत के लिए जरूरी 198 सीटों के आंकड़े से काफी दूर है। ऐसे में अल मंसूरी को सरकार बनाने के लिए दूसरे राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करना होगा।
चुनाव में नेशनल रैली ऑफ इंडिपेंडेंट्स (RNI) को 66 सीटें मिलीं, जबकि इश्तिकलाल पार्टी 65 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (PJD) ने 54 सीटें हासिल कीं। PJD ने 2021 में केवल 13 सीटें जीती थीं और इस चुनाव में उसकी सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
पहली महिला के तौर पर संभालेंगी सरकार की कमान
फातिमा एज़्ज़हरा अल मंसूरी की नियुक्ति मोरक्को के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह देश की सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली महिला हैं। नियुक्ति के बाद उन्होंने इसे अपने देश के इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताया और कहा कि पहली बार किसी महिला को सरकार का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मिलना मोरक्को की महिलाओं के लिए गर्व की बात है।
अल मंसूरी अरब दुनिया में सरकार का नेतृत्व करने वाली दूसरी महिला भी बनी हैं। उनसे पहले ट्यूनीशिया की नजला बौडेन 2021 से 2023 तक प्रधानमंत्री पद पर रह चुकी हैं।
कौन हैं फातिमा एज़्ज़हरा अल मंसूरी?
फातिमा एज़्ज़हरा अल मंसूरी पेशे से वकील हैं और मोरक्को की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। वह ऑथेंटिसिटी एंड मॉडर्निटी पार्टी से 2008 में जुड़ी थीं। वर्ष 2009 में वह माराकेश की पहली महिला मेयर बनीं। इसके बाद 2021 में उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली। वह आवास और शहरी नियोजन से जुड़े मंत्री पद पर भी काम कर चुकी हैं।
राजनीतिक रूप से PAM को मोरक्को की प्रमुख केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टियों में गिना जाता है। पार्टी की स्थापना 2008 में हुई थी और इसके संस्थापकों में किंग मोहम्मद VI के सलाहकार फौआद अली एल हिम्मा का नाम शामिल है।
गठबंधन सरकार बनाना सबसे बड़ी चुनौती
PAM को चुनाव में सबसे अधिक सीटें मिलने के बावजूद बहुमत हासिल नहीं हुआ है। इसलिए नई प्रधानमंत्री के सामने सबसे पहला काम सहयोगी दलों के साथ बातचीत कर सरकार गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाना होगा। अल मंसूरी ने नियुक्ति के बाद कहा कि वह पहले अपनी पार्टी के भीतर विचार-विमर्श करेंगी और उसके बाद अन्य राजनीतिक दलों से बातचीत शुरू करेंगी।
मोरक्को के संविधान के तहत संसद के निचले सदन में सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी से किंग प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। प्रधानमंत्री को इसके बाद सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होती है।
युवाओं, रोजगार और महंगाई पर रहेगा जोर
नई सरकार के सामने बेरोजगारी, महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती होंगे। खासकर युवाओं से जुड़े रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं के सवाल चुनावी राजनीति में प्रमुख रहे हैं।
PAM ने अपने चुनावी कार्यक्रम में औसतन पांच प्रतिशत वार्षिक आर्थिक वृद्धि, दो प्रतिशत महंगाई और पांच साल के कार्यकाल में कम से कम 10 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है।
2030 विश्व कप की तैयारियां भी जिम्मेदारी
अल मंसूरी के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने 2030 FIFA World Cup की तैयारियां भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होंगी। मोरक्को स्पेन और पुर्तगाल के साथ इस विश्व कप की मेजबानी करेगा। नई सरकार को आर्थिक और सामाजिक मुद्दों के साथ बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स और आयोजन की तैयारियों पर भी काम करना होगा।
कम मतदान के बीच बदला राजनीतिक समीकरण
मोरक्को का यह संसदीय चुनाव कम मतदान के बीच हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मतदान प्रतिशत करीब 38 प्रतिशत रहा, जो हाल के वर्षों में बेहद कम स्तर है। चुनाव के दौरान युवाओं में बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं को लेकर असंतोष भी प्रमुख मुद्दों में रहा।
अल मंसूरी ने सरकार गठन के बाद नागरिकों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ठोस और व्यावहारिक समाधान देने की बात कही है। अब उनकी प्राथमिक चुनौती संसद में समर्थन जुटाकर गठबंधन सरकार बनाना और चुनावी वादों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना होगी।
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