चीन की बढ़ती चुनौती के बीच भारत-अमेरिका में अहम खनिज समझौता, क्वाड समिट में बड़ा फैसला

चीन की बढ़ती दादागिरी के बीच इंडो-पैसिफिक पर फोकस, रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन मजबूत करने पर बनी सहमति

Quad Summit 2026 में भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिज और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए बड़ा समझौता किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और चीन की बढ़ती चुनौती पर भी चर्चा की।

नई दिल्ली। क्वाड समिट 2026 के दौरान भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए बड़ा रणनीतिक समझौता किया है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक आक्रामकता को लेकर वैश्विक चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के प्रतिनिधि शामिल हुए। क्वाड समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।

इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता पर जोर

बैठक को संबोधित करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को वैश्विक विकास और स्थिरता का प्रमुख केंद्र बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्वाड देशों को समुद्री सुरक्षा, आर्थिक विकल्पों और भरोसेमंद साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में मिलकर काम करना होगा।

जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया सप्लाई चेन संकट, कनेक्टिविटी चोक पॉइंट्स, मैन्युफैक्चरिंग असंतुलन और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में क्वाड जैसे मंच की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत-अमेरिका ने किया महत्वपूर्ण खनिज समझौता

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने घोषणा की कि भारत और अमेरिका ने जरूरी खनिजों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई, माइनिंग और प्रोसेसिंग को सुरक्षित करने के लिए द्विपक्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा कि यह समझौता बेहद सही समय पर हुआ है और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती देना है। इस साझेदारी के तहत माइनिंग, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग, निवेश और सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति

क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उपकरणों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। वर्तमान में इनकी वैश्विक सप्लाई और प्रोसेसिंग में चीन का दबदबा है।

ऐसे में भारत-अमेरिका समझौते को चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाएगा।

मार्को रुबियो बोले- भारत अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के साझा हितों और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करने की प्रतिबद्धता का मजबूत उदाहरण है।

रुबियो ने कहा कि दुनिया की तेजी से बदलती परिस्थितियों में जरूरी खनिजों तक दीर्घकालिक और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना दोनों देशों के लिए आवश्यक हो गया है।

क्वाड को और मजबूत बनाने की अपील

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि क्वाड को और अधिक प्रभावी तथा मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के लिए चारों देशों से सहयोग बढ़ाने की अपील की।

वहीं जयशंकर ने कहा कि समुद्री लोकतंत्र और मुक्त अर्थव्यवस्था वाले देशों के रूप में क्वाड सदस्य एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए साझा जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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