“रामपुर में विधायक शफीक अहमद अंसारी के बेटे उमैर ने CHC में निरीक्षण कर अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर डॉक्टरों को फटकार लगाई। CMO और SP ने जांच के आदेश दिए।“
रामपुर। रामपुर जिले के स्वार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां विधायक का बेटा खुद ‘निरीक्षण’ करने पहुंच गया और अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर डॉक्टरों को निर्देश देने लगा। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

विधायक का बेटा उमैर बना ‘निरीक्षक’
जानकारी के अनुसार, अपना दल (एस) के विधायक शफीक अहमद अंसारी का 22 वर्षीय बेटा उमैर स्वार CHC पहुंचा। उसने इमरजेंसी वार्ड का दौरा किया, मरीजों का हालचाल जाना और डॉक्टरों व स्टाफ से पूछताछ की।
इसके बाद वह अधीक्षक कक्ष में पहुंचा और उनकी कुर्सी पर बैठकर दस्तावेजों की जांच करने लगा। इस दौरान डॉक्टर और कर्मचारी उसके सामने खड़े नजर आए।

सुरक्षा में तैनात रहे पुलिसकर्मी
चौंकाने वाली बात यह रही कि उमैर के साथ एक दरोगा और तीन सिपाही मौजूद थे। यह सुरक्षा बिना किसी आधिकारिक प्रोटोकॉल के दी गई बताई जा रही है, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
करीब एक घंटे तक चले इस ‘निरीक्षण’ के दौरान उमैर ने कई कर्मचारियों को फटकार लगाई और कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

सीएमओ ने कहा—नहीं है कोई अधिकार
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपा सिंह ने स्पष्ट कहा कि विधायक के बेटे या परिवार के किसी सदस्य को सरकारी अस्पताल का निरीक्षण करने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर निर्देश देना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है, जिसे 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस पर भी उठे सवाल
एसपी सोमेंद्र मीणा ने कहा कि यह जांच की जाएगी कि किन परिस्थितियों में पुलिसकर्मी उमैर के साथ मौजूद थे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विधायक का पक्ष
विधायक शफीक अहमद अंसारी ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शिकायत मिली थी, इसलिए उन्होंने अपने बेटे को स्थिति की जानकारी लेने के लिए भेजा था। उनके अनुसार, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

पारिवारिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि
उमैर अंसारी के बारे में बताया गया कि वह 5वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुका है और फिलहाल पारिवारिक कार्यों में सहयोग करता है। वह आधिकारिक तौर पर किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं है, हालांकि स्थानीय स्तर पर उसे विधायक प्रतिनिधि बताया जा रहा है।
क्या कहता है प्रोटोकॉल?
सरकारी नियमों के अनुसार—
- निरीक्षण और निर्देश देने का अधिकार केवल अधिकृत अधिकारियों या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को होता है।
- उनके परिवार के सदस्यों को यह अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होता।
- किसी अधिकारी की कुर्सी पर बैठना और निर्देश देना प्रशासनिक मर्यादा के विरुद्ध माना जाता है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”







