“सहारा रेगिस्तान में 1500 किलोमीटर लंबा ‘हबूब’ धूल तूफान उठा, जो यूरोप तक फैल रहा है। जानिए इसके कारण, प्रभाव और वैश्विक जलवायु पर असर।“
नई दिल्ली। सहारा धूल तूफान: उत्तरी अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में एक विशाल और खतरनाक धूल तूफान उठा है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘हबूब’ नाम दिया है। करीब 1500 किलोमीटर चौड़ा यह तूफान इतना विशाल है कि इसे अंतरिक्ष से भी स्पष्ट देखा जा सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह तूफान तेज हवाओं के कारण बना है, जो रेगिस्तान की सतह से भारी मात्रा में धूल और महीन कणों को उठाकर वातावरण में फैला रही हैं। यह धूल अब उत्तरी अफ्रीका से आगे बढ़कर यूरोप के कई हिस्सों तक पहुंच रही है।
यूरोप तक असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह धूल स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों तक पहुंच चुकी है। कई जगहों पर दृश्यता कम हो गई है और वातावरण धुंधला दिखाई दे रहा है।
‘खूनी बारिश’ का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह धूल बारिश के साथ मिलती है, तो ‘रेड रेन’ यानी लाल रंग की बारिश होती है। यह घटना पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंताजनक है।
स्वास्थ्य पर खतरा
इस तरह के धूल तूफान से हवा में PM कणों की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा मरीजों के लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।
सौर ऊर्जा पर असर
वैज्ञानिकों के अनुसार, सहारा की धूल सोलर पैनलों तक पहुंचने वाली धूप को कम कर देती है, जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन प्रभावित होता है।
पर्यावरण पर दोहरा असर
जहां एक तरफ यह धूल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, वहीं दूसरी ओर यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पोषक तत्व भी प्रदान करती है, जिससे प्लैंकटन का विकास होता है।
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