“बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने सोशल मीडिया पोस्ट में राज्यसभा जाने की इच्छा जताई है। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।“
हाइलाइट्स:
- बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताई।
- सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खुद दी जानकारी।
- बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज।
- विपक्ष ने बीजेपी पर जदयू को कमजोर करने का आरोप लगाया।
- जदयू में भी फैसले को लेकर राजनीतिक हलचल।
पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने सोशल मीडिया के जरिए खुद यह घोषणा कर दी कि वह राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं। उनके इस पोस्ट के बाद पिछले कई दिनों से चल रही इस्तीफे की अटकलों पर विराम लग गया है, लेकिन साथ ही राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राज्यसभा जाने की इच्छा जताई
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर जो विश्वास और समर्थन बनाए रखा है, उसी के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा की है। उन्होंने कहा कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है, जिसके लिए वह जनता के आभारी हैं।
नीतीश कुमार ने लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में वे राज्यसभा सदस्य बनना चाहते हैं।
उन्होंने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि बिहार के लोगों के साथ उनका संबंध आगे भी बना रहेगा और विकसित बिहार के संकल्प को पूरा करने के लिए वे लगातार मार्गदर्शन देते रहेंगे।
सीएम पद खाली होने की संभावना
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। अगर वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं, तो मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसे में राज्य की सत्ता में नए नेतृत्व की चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गठबंधन में भाजपा का दबदबा जदयू की तुलना में अधिक है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि नई सरकार में मुख्यमंत्री पद भाजपा के किसी नेता को मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो लंबे समय बाद बिहार में भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।
डिप्टी सीएम को लेकर अटकलें
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नई सरकार के गठन के बाद जदयू को संतुलित रखने के लिए दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। इनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है। हालांकि इस संबंध में अभी तक आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं हुई है।
विपक्ष ने साधा निशाना
नीतीश कुमार के फैसले को लेकर विपक्ष भी हमलावर हो गया है। Tejashwi Yadav की पार्टी Rashtriya Janata Dal के नेता Mrityunjay Tiwari ने कहा कि बिहार की राजनीति में अचानक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद ही भाजपा द्वारा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाना किसी ने नहीं सोचा था। उन्होंने दावा किया कि तेजस्वी यादव पहले से ही यह कहते रहे हैं कि भाजपा जदयू को कमजोर कर देगी और अंततः नीतीश कुमार को सत्ता से हटाया जाएगा।
जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी
इस घटनाक्रम के बाद जदयू के अंदर भी हलचल तेज हो गई है। कई कार्यकर्ता सुबह से ही नीतीश कुमार के आवास के बाहर जुटकर इस फैसले पर नाराजगी और दुख व्यक्त कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही पार्टी और बिहार ने विकास का नया दौर देखा है।
चारों सदनों के सदस्य बनने का मौका
अगर नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं, तो वे देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जो विधानमंडल और संसद के सभी चार सदनों—विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—के सदस्य रह चुके होंगे।
फिलहाल बिहार की राजनीति में इस फैसले के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और नई सरकार का स्वरूप कैसा होगा।
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