संभल जिला न्यायालय परिसर में कैदी को बैरक में रखने को लेकर जीआरपी और बंदीगृह में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया। करीब 25 मिनट तक मारपीट हुई और घटना का वीडियो वायरल है।
संभल। जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को उस समय हंगामा मच गया, जब जीआरपी और बंदीगृह में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच मारपीट शुरू हो गई। मोबाइल चोरी के आरोपी को बैरक में रखने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हाथापाई में बदल गया। करीब 25 मिनट तक चले विवाद में दोनों पक्षों के पुलिसकर्मियों की वर्दी तक फट गई। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कैदी को बैरक में रखने को लेकर शुरू हुआ विवाद
चंदौसी थाना प्रभारी विवेक ज्वाला सिंह के अनुसार, शुक्रवार को जीआरपी थाने में तैनात सिपाही धर्मेंद्र और तारीक मोबाइल चोरी के एक आरोपी को न्यायालय में पेश करने के लिए पहुंचे थे। न्यायालय में पेशी पूरी होने के बाद दोनों सिपाही आरोपी को कोर्ट परिसर स्थित बंदीगृह में दाखिल कराने पहुंचे।
इसी दौरान बंदीगृह में तैनात सिपाही विनीत कुमार ने आरोपी को तत्काल बैरक में रखने से मना कर दिया। बताया गया कि आरोपी के पैर में गंभीर चोट थी। बंदीगृह के सिपाही का कहना था कि चोट को देखते हुए संबंधित प्रक्रिया पूरी होने तक उसे बैरक में रखने से पहले जरूरी कार्रवाई की जाए।
इसी बात को लेकर जीआरपी और बंदीगृह में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
बहस के बाद हाथापाई, 25 मिनट तक चलता रहा विवाद
शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिसकर्मी एक-दूसरे से भिड़ गए और मारपीट शुरू हो गई। करीब 25 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच विवाद और हाथापाई होती रही।
इस दौरान बंदीगृह में मौजूद अन्य आरोपी भी पुलिसकर्मियों के बीच हो रही मारपीट देखते रहे। न्यायालय परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
चंदौसी थाना प्रभारी विवेक ज्वाला सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों के बीच विवाद और मारपीट का मामला संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई, मारपीट में किसकी भूमिका रही और किस पुलिसकर्मी की ओर से अनुशासनहीनता की गई। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।









