रूसी तेल पर भारत को बड़ी राहत! 500% टैरिफ की जगह 100% शुल्क का प्रस्ताव, अमेरिकी बिल में संशोधन

रूस से तेल खरीदने वाले भारत और चीन पर 500% टैरिफ लगाने के प्रस्ताव में अमेरिकी सीनेट ने बड़ा बदलाव किया है। नए रूस प्रतिबंध बिल में अधिकतम 100% टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है। जानिए ट्रंप, रूस, भारत और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी पूरी खबर।

वॉशिंगटन। रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और चीन पर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 500 प्रतिशत टैरिफ का खतरा फिलहाल कम होता नजर आ रहा है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक का संशोधित मसौदा पेश किया गया है, जिसमें रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत की बजाय अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

यह संशोधन ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलाव से भारत सहित उन देशों को राहत मिलने की संभावना है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी कच्चे तेल पर निर्भर हैं।

भारत और चीन पर क्यों था 500% टैरिफ का प्रस्ताव?

अप्रैल 2025 में पेश किए गए मूल विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को कम करना और अन्य देशों को मॉस्को से ऊर्जा खरीदने से हतोत्साहित करना था।

अब संशोधित प्रस्ताव में इस भारी टैरिफ को घटाकर अधिकतम 100 प्रतिशत करने का सुझाव दिया गया है। इससे भारत और चीन जैसे बड़े आयातकों पर संभावित आर्थिक दबाव पहले की तुलना में काफी कम हो सकता है।

किन देशों पर होगा असर?

सीनेट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। वहीं प्राकृतिक गैस के प्रमुख खरीदारों में चीन, जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम का नाम शामिल है।

कुछ देशों को मिल सकती है विशेष छूट

संशोधित विधेयक में एक विशेष प्रावधान भी जोड़ा गया है। इसके तहत ऐसे देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मिल सकती है जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और धीरे-धीरे अपनी निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं।

इस प्रावधान का लाभ जापान, फ्रांस, बेल्जियम और हंगरी जैसे देशों को मिल सकता है।

रूस के शैडो फ्लीट पर कड़ा शिकंजा

विधेयक में रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाने पर लिया गया है। यह ऐसे तेल टैंकरों का नेटवर्क है जो पश्चिमी प्रतिबंधों से बचते हुए समुद्री मार्ग से रूसी तेल का परिवहन करते हैं।

इसके अलावा रूस के केंद्रीय बैंक, कई प्रमुख वित्तीय संस्थानों और यामल LNG तथा आर्कटिक LNG जैसी बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

ट्रंप को मिलेगी विशेष छूट देने की शक्ति

संशोधित विधेयक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह अधिकार देने का भी प्रस्ताव है कि यदि उन्हें लगे कि अमेरिकी राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वे इन प्रतिबंधों को पूरी तरह या आंशिक रूप से अस्थायी रूप से स्थगित या माफ कर सकेंगे।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदता रहा है। यदि 500 प्रतिशत टैरिफ लागू होता तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता था। हालांकि नए प्रस्ताव में अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ की सीमा तय होने से तत्काल राहत की उम्मीद बढ़ी है।

हालांकि यह अभी केवल विधेयक का संशोधित मसौदा है। इसे अमेरिकी सीनेट और प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है। अंतिम स्वरूप में बदलाव संभव है।

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