“उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से गंगा-यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं। वाराणसी में घाट जलमग्न होने से छत पर शवदाह हो रहा है, जबकि प्रयागराज में पांच पुल डूबने से 45 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण गंगा, यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने से घाटों पर पानी भर गया है, जबकि प्रयागराज के कोरांव क्षेत्र में बेलन नदी खतरे के निशान को पार कर गई है।
हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रयागराज में पांच छोटे पुल पानी में डूब गए हैं। इससे करीब 45 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और लगभग 62 हजार लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
10 घंटे में 42 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर
वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार शाम छह बजे नदी का जलस्तर 67.14 मीटर दर्ज किया गया। महज 10 घंटे में जलस्तर करीब 42 सेंटीमीटर बढ़ा। हालांकि खतरे का निशान 70.212 मीटर है, लेकिन तेजी से बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों और घाटों पर चिंता बढ़ा दी है।
गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों से ऊपर पहुंचने के बाद कई घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। तटवर्ती क्षेत्रों में भी पानी तेजी से फैल रहा है। जलप्रवाह तेज होने के कारण प्रशासन ने नौका संचालन पर रोक लगा दी है।
मणिकर्णिका घाट पर छत के ऊपर हो रहा शवदाह
गंगा का जलस्तर बढ़ने का सबसे गंभीर असर वाराणसी के प्रमुख शवदाह स्थलों पर दिखाई दे रहा है। मणिकर्णिका महाश्मशान की गलियों तक गंगा का पानी पहुंच गया है। शवदाह स्थल के निचले हिस्से में पानी भरने के कारण अब ऊपरी हिस्से और छत पर चिताएं जलाई जा रही हैं।
हरिश्चंद्र घाट भी पहले से जलमग्न है। यहां सीढ़ियों के ऊपर शवदाह किया जा रहा है। गंगा का पानी लगातार बढ़ने से शवदाह के लिए आने वाले लोगों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाला जलमार्ग बंद
गंगा में तेज बहाव को देखते हुए नाव से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाला मार्ग भी बंद कर दिया गया है। नौका संचालन रुकने से घाटों के रास्ते मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है।
दशाश्वमेध और शीतला घाट पर होने वाली सांध्य गंगा आरती के स्थान में भी बदलाव करना पड़ा है। पानी बढ़ने के कारण आरती अब घाट की सीढ़ियों के बजाय ऊपरी हिस्से और छत पर की जा रही है।
प्रयागराज के कोरांव में बेलन नदी खतरे के निशान के पार
प्रयागराज के कोरांव क्षेत्र में बेलन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
पानी बढ़ने से पांच छोटे पुल पूरी तरह डूब गए हैं। इससे करीब 45 गांवों का संपर्क टूट गया है और लगभग 62 हजार लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ने पर प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव की तैयारियां की जा रही हैं।
गंगा-यमुना समेत कई नदियों पर नजर
उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है। इसके कारण गंगा और यमुना के साथ-साथ कई सहायक नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। पूर्वी यूपी में भारी बारिश के चलते स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
प्रयागराज और वाराणसी के अलावा नदी किनारे बसे अन्य जिलों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। निचले इलाकों में पानी भरने से ग्रामीणों के सामने आवागमन, पशुओं की सुरक्षा और दैनिक जरूरतों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
घाटों पर बढ़ते पानी से बदली व्यवस्था
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ घाटों पर सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नौका संचालन बंद होने के अलावा घाटों के बीच संपर्क भी टूट गया है। धार्मिक अनुष्ठानों और शवदाह के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।
फिलहाल प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले घंटों में यदि गंगा और अन्य नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।







