योगी सरकार का हेल्थ रिफॉर्म: जिला अस्पतालों में बढ़ी क्षमता, मातृ-शिशु सेवाओं में सुधार

योगी सरकार के प्रयासों से रेफरल में आई कमी, RRCT मॉडल और डॉक्टरों के प्रशिक्षण से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार

Yogi Adityanath सरकार के प्रयासों से यूपी के जिला अस्पतालों में बड़ा बदलाव आया है। RRTC मॉडल और डॉक्टरों के प्रशिक्षण से अब जटिल प्रसव के मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में योगी सरकार के प्रयास अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से नजर आने लगे हैं। प्रदेश के छोटे जिलों के अस्पताल, जो पहले जटिल मामलों को बड़े शहरों के लिए रेफर करते थे, अब खुद ऐसे मामलों को संभालने में सक्षम हो रहे हैं।

सरकार द्वारा स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और डॉक्टरों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिए जाने का ही परिणाम है कि जटिल प्रसव जैसे मामलों में भी मरीजों को अब अपने ही जिले में इलाज मिल रहा है। इससे न केवल मरीजों का समय और खर्च बच रहा है, बल्कि मातृ और नवजात मृत्यु दर में भी कमी आने की उम्मीद है।

प्रदेश में रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (RRCT) मॉडल इस बदलाव की अहम कड़ी बनकर उभरा है। इस मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेजों को ‘हब’ और जिला अस्पतालों को ‘स्पोक’ के रूप में विकसित किया गया है, जहां से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को लगातार प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेज वर्तमान में RRCT सेंटर के रूप में कार्य कर रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की क्षमता में लगातार वृद्धि की जा रही है। पिछले चार वर्षों में 76 जिला अस्पतालों के 1791 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

इस मॉडल का प्रभाव कासगंज जैसे जिलों में साफ तौर पर देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में जहां जिला महिला अस्पताल में सी-सेक्शन जैसी प्रक्रिया चुनौती मानी जाती थी, वहीं अब यहां नियमित रूप से जटिल ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अस्पताल में आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित स्टाफ के कारण अधिकांश मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो गया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान भी इस पहल की गति धीमी नहीं पड़ी। ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखा गया, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं और संस्थागत प्रसव की व्यवस्था सुचारू बनी रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एक हालिया जटिल केस में डॉक्टरों ने हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी जैसी गंभीर स्थिति को समय रहते पहचानकर सफल सर्जरी की, जिससे मरीज की जान बचाई जा सकी।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में यह परिवर्तन ‘रेफरल से समाधान’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

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लखनऊ से स्टेट हेड संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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