“यूपी राज्यसभा चुनाव में नामांकन जांच के दौरान दो निर्दलीय प्रत्याशियों कांटे सायन्ना और ओमकार नाथ चौरसिया के पर्चे प्रस्तावकों की कमी के कारण खारिज हो गए। अब 10 सीटों पर भाजपा के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी मैदान में हैं।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव की तस्वीर नामांकन पत्रों की जांच के बाद लगभग साफ हो गई है। जांच के दौरान दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए। इनमें तेलंगाना के कांटे सायन्ना और लखनऊ के ओमकार नाथ चौरसिया शामिल हैं। दोनों प्रत्याशियों के पास नामांकन के लिए जरूरी संख्या में विधायक प्रस्तावक नहीं थे।
प्रस्तावकों की कमी बनी नामांकन रद होने की वजह
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान सामने आया कि दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने आवश्यक 10 विधायक प्रस्तावकों के नाम अपने नामांकन पत्र में दर्ज नहीं किए थे। नियमों के तहत आवश्यक प्रस्तावक नहीं होने के कारण उनके नामांकन पत्र वैध नहीं पाए गए।
चुनाव अधिकारी अजीत कुमार वर्मा ने बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद दोनों पर्चों को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव के मैदान में निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनौती समाप्त हो गई।
10 सीटों के लिए अब 10 प्रत्याशी
दो नामांकन खारिज होने के बाद उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए अब कुल 10 प्रत्याशी ही मैदान में रह गए हैं। इनमें सत्तारूढ़ भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो प्रत्याशी शामिल हैं।
चूंकि सीटों की संख्या और मैदान में बचे प्रत्याशियों की संख्या बराबर है, ऐसे में सभी 10 प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया नाम वापसी की अवधि पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगी।
नौ अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख
राज्यसभा चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 9 अक्टूबर को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद यदि किसी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया तो सभी 10 प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा की जाएगी।
इस तरह नामांकन पत्रों की जांच के बाद यूपी में राज्यसभा चुनाव को लेकर मुकाबले की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशी
राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भाजपा ने आठ प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया है। नामांकन के बाद सियासी दलों की ओर से अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में विधायकों के बीच रणनीति को लेकर गतिविधियां तेज हुई थीं।
हालांकि दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे निरस्त होने के बाद अब चुनाव में सीधा मुकाबला होने की संभावना नहीं रह गई है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
नामांकन जांच के बाद बदली चुनावी तस्वीर
नामांकन पत्रों की जांच राज्यसभा चुनाव की महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। इसमें प्रत्याशियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों और प्रस्तावकों समेत निर्धारित शर्तों की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया में कांटे सायन्ना और ओमकार नाथ चौरसिया के नामांकन में प्रस्तावकों की कमी सामने आई।
दोनों पर्चे निरस्त होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों की संख्या भी 10 रह गई है। अब सबकी निगाहें नौ अक्टूबर की नाम वापसी प्रक्रिया और उसके बाद होने वाली औपचारिक निर्वाचन घोषणा पर टिकी हैं।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”








