शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के मानदेय में होगी 15 दिन की कटौती, जानें कारण

उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के जुलाई मानदेय में 15 दिन की कटौती की जाएगी। जून में मिले अतिरिक्त भुगतान का समायोजन किया जाएगा। करीब 1.48 लाख शिक्षामित्र और 24 हजार से अधिक अनुदेशक इस फैसले से प्रभावित होंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए अहम खबर है। जून महीने में पूरे माह का मानदेय मिलने के बाद अब जुलाई के मानदेय में 15 दिन की राशि कम की जाएगी। विभाग की ओर से यह कटौती अतिरिक्त भुगतान के समायोजन के रूप में की जा रही है।

समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि जून में किए गए अतिरिक्त भुगतान की राशि को जुलाई के मानदेय में समायोजित किया जाए।

जून में तकनीकी कारणों से मिला था पूरा मानदेय

परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जून महीने में 15 दिन का ग्रीष्मावकाश था। इसके बावजूद तकनीकी प्रक्रिया के कारण उनके खातों में पूरे महीने का मानदेय भेज दिया गया था।

अब विभाग ने इसे अतिरिक्त भुगतान मानते हुए जुलाई के मानदेय से समायोजित करने का निर्णय लिया है। इसके चलते अगस्त में मिलने वाले मानदेय में 15 दिन की राशि कम होकर आएगी।

1.48 लाख शिक्षामित्र और 24 हजार अनुदेशक होंगे प्रभावित

प्रदेश में करीब 1.48 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जिन्हें हर महीने 18 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। वहीं, 24 हजार से अधिक अनुदेशकों को प्रतिमाह 17 हजार रुपये मानदेय मिलता है।

समायोजन प्रक्रिया के तहत इन सभी के जुलाई मानदेय में 15 दिन की राशि कम की जाएगी।

SNA स्पर्श प्रणाली से होगा भुगतान समायोजन

वर्तमान में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय एसएनए स्पर्श प्रणाली के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजा जा रहा है। इसी ऑनलाइन व्यवस्था के तहत अतिरिक्त भुगतान की राशि का समायोजन किया जाएगा।

विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया केवल तकनीकी रूप से हुए अतिरिक्त भुगतान को संतुलित करने के लिए की जा रही है।

मानदेय में कटौती से शिक्षामित्रों में नाराजगी की संभावना

हालांकि विभाग ने इसे भुगतान समायोजन बताया है, लेकिन जुलाई के मानदेय में राशि कम मिलने से शिक्षामित्रों और अनुदेशकों में नाराजगी की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह कटौती किसी नए नियम के तहत नहीं बल्कि जून में अधिक भुगतान हो जाने के कारण की जा रही है।

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