योगी सरकार की नई पहल, उत्तर से दक्षिण तक मिनटों में सफर

Yogi Government North South Corridor UP योजना को मंजूरी मिल गई है। 6 नए हाईवे कॉरिडोर से 24 जिलों को फायदा होगा। दो साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट, आवागमन होगा आसान।”

हाइलाइट्स:

  • योगी सरकार ने 6 नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को दी मंजूरी
  • दो साल में पूरे होंगे हाईवे प्रोजेक्ट
  • 24 से ज्यादा जिलों को सीधा लाभ
  • व्यापार, निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
  • PWD, NHAI और MoRTH मिलकर करेंगे निर्माण

लखनऊ। Yogi Government North South Corridor UP को लेकर उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति के बाद राज्य सरकार ने उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले छह नए हाईवे कॉरिडोर के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। इन कॉरिडोर के निर्माण से प्रदेश के 24 से अधिक जिलों में आवागमन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी

लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही कैबिनेट से लागत प्रस्ताव (Estimate) पारित कराकर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि दो वर्षों के भीतर सभी कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएं

पहली बार नॉर्थ-साउथ कनेक्टिविटी पर फोकस

अब तक उत्तर प्रदेश में अधिकतर एक्सप्रेसवे और हाईवे पूर्व-पश्चिम दिशा में विकसित किए गए हैं। यह पहली बार है जब सरकार ने उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाली कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दो वर्षों से इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे थे।

केंद्र सरकार से भी की गई थी मांग

इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी चर्चा की थी। इसके अलावा राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष भी नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर की जरूरत रखी थी।

छह प्रस्तावित नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का विवरण

 श्रावस्ती–प्रयागराज कॉरिडोर (262 किमी)

इकाउना–अयोध्या–सुल्तानपुर–प्रतापगढ़–प्रयागराज को जोड़ेगा।
यह कॉरिडोर पूर्वांचल और प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा।

 कुशीनगर–वाराणसी कॉरिडोर (220 किमी)

कुशीनगर, देवरिया, मऊ, गाजीपुर होते हुए वाराणसी तक सीधी कनेक्टिविटी।

 नेपाल सीमा–प्रयागराज कॉरिडोर (295 किमी)

भारत-नेपाल सीमा से सिद्धार्थनगर, जौनपुर होते हुए प्रयागराज तक।

 लखीमपुर–बांदा कॉरिडोर (502 किमी)

तराई से बुंदेलखंड तक की दूरी होगी आसान, कई औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा लाभ।

 बरेली–ललितपुर कॉरिडोर (547 किमी)

पश्चिमी यूपी से बुंदेलखंड को जोड़ेगा, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे से भी कनेक्शन।

 पीलीभीत–उरई–हरपालपुर कॉरिडोर (514 किमी)

टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे तक सीधी सड़क कनेक्टिविटी।

निर्माण एजेंसियां और समयसीमा

इन कॉरिडोर का निर्माण PWD, NHAI और MoRTH के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि दो साल के भीतर सभी प्रोजेक्ट पूरे कर लिए जाएंगे

देश-दुनिया से जुड़े विकास, राजनीति और नीतिगत फैसलों की भरोसेमंद जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें।”
विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

 

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