2025 में भारत–अमेरिका रिश्ते पहुंचे सबसे निचले स्तर पर, ट्रंप और पाकिस्तान कारक बने बाधा, डिप्लोमेसी ठप

वर्ष 2025 में भारत-अमेरिका संबंध दशकों के सबसे जटिल दौर से गुजर रहे हैं और यह रिश्ता “लगभग रॉक बॉटम” पर पहुंच गया है। यह आकलन हडसन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ विशेषज्ञ अपर्णा पांडे ने IANS को दिए इंटरव्यू में किया। अपर्णा पांडे के अनुसार, मौजूदा दौर में अमेरिका, खासकर ट्रंप प्रशासन, भारत को एक रणनीतिक साझेदार के बजाय केवल लेन-देन (Transactional) के नजरिए से देख रहा है। उन्होंने कहा,
“फिलहाल यह रिश्ता रणनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह ट्रांजैक्शनल और टैक्टिकल बन चुका है।”

 क्यों बिगड़े रिश्ते?
2025 की शुरुआत फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शिखर बैठक से सकारात्मक रही, लेकिन इसके बाद संबंध आगे नहीं बढ़ सके। इसका सबसे बड़ा कारण व्यापार विवाद और भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ रहे।पांडे के मुताबिक, पहले की अमेरिकी सरकारें मानकर चलती थीं कि भारत के साथ व्यापार आसान नहीं होगा, लेकिन मौजूदा प्रशासन का अत्यधिक फोकस केवल टैरिफ और डील पर है।

पाकिस्तान फैक्टर की वापसी
हालांकि उच्च स्तर की कूटनीति ठप है, लेकिन मानवीय सहायता, आपदा राहत और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे क्षेत्रों में कार्यस्तरीय संबंध अब भी जारी हैं। अपर्णा पांडे ने कहा कि पाकिस्तान फिर से अमेरिका-भारत रिश्तों में एक फैक्टर बनकर उभरा है। उन्होंने माना कि पाकिस्तान पारंपरिक रूप से अमेरिकी प्रशासन को साधने में माहिर रहा है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि US-Pakistan रिश्तों की एक सीमित हद है, और यह कोल्ड वॉर जैसे दौर में वापस नहीं जाएगा।

2026 को लेकर पांडे ने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील, शीर्ष नेतृत्व शिखर बैठक और भारत में श्रम सुधार, बीमा सुधार व न्यूक्लियर लायबिलिटी कानून  रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया अनिश्चित है, लेकिन सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।”

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