अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  महिला सशक्तिकरण की वर्तमान स्थिति पर विचार गोष्ठी का आयोजन 

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क लखीमपुर : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में शनिवार को महिला सशक्तीकरण की वर्तमान स्थिति विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्राचार्य प्रो. हेमन्त पाल ने इस अवसर पर महाविद्यालय की शिक्षक प्रो. नीलम त्रिवेदी, प्रो. नूतन सिंह व प्रो. ज्योति पंत को सम्मानित किया। महिला सशक्तीकरण की वर्तमान स्थिति पर आयोजित विचार गोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष चन्द्रा ने कहा कि अशिक्षा एवं गरीबी महिलाओं के विकास में बाधक है। यद्यपि शिक्षा, व्यावसाय और सेवा क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। हम सबको उनके अधिकारों और हक की बात करने के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना होगा। वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. एस.के. पाण्डेय ने कहा कि पुरुष और महिलाओं के मध्य भेदभाव की बात करना उचित नहीं है। भेदभाव के बिना उन्नत विचारों के साथ नारी और पुरुष सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीति क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहे हैं। इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. नूतन सिंह ने गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए बताया कि दुनियां की सभी संस्कृतियों में महिलाओं के उत्थान के लिए बल दिया गया है. इसके बावजूद आज भी महिलाओं के साथ लिंग भेद के आधार पर व्यवहार होता है। इसीकम में महाविद्यालय की छात्रा विभा त्रिवेदी, स्वाती श्रीवास्तव, लाइबा और रोशनी देवी ने गीत और कविता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण पर विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कार्यक्रम संयोजक प्रो. नीलम त्रिवेदी ने कहा कि महिला और पुरुष एक दूसरे के सहयोगी हैं। महिलायें आज पुलिस सेवा, सेना, कृषि, कुटीर उद्योग, विज्ञान एवं तकनीकी आदि क्षेत्रों में अपना योगदान दे रही है। पुरुष इस बात को समझ रहे हैं और उनका सम्मान भी कर रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस हम सभी को महिलाओं के प्रति आदर और सम्मान प्रकट करने का दिन है। सभी को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक डा. आर.पी.एस. तोमर, डा. जे.एन. सिंह, प्रो. विशाल द्विवेदी, डा. इष्ट विभु, डा. मनोज कुमार, डा. ओ.पी. सिंह, डा. सतेन्द्र पाल सिंह, डा. सौरभ वर्मा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।

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