एफडीआर तकनीक से उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़कों का निर्माण बना उदाहरण

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क लखनऊ : उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत बनाई जा रही सड़कों के निर्माण में एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक को अपनाकर शानदार परिणाम सामने आए हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद अब सभी ग्रामीण सड़कों का निर्माण इसी तकनीक से किया जा रहा है। इस तकनीक की खास बात यह है कि पुराने मार्ग की गिट्टी को ही सीमेंट और विशेष स्टेबलाइज़र की मदद से पुनः उपयोग में लाया जाता है, जिससे नई गिट्टी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत के साथ-साथ कार्बन फुटप्रिंट में भी भारी कमी आती है।

एफडीआर तकनीक पर आधारित निर्माण कार्यों का डिज़ाइन और परीक्षण प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी, सीआरआरआई और एनआईटी द्वारा किया जा रहा है। इस तकनीक से न केवल पर्यावरण का संरक्षण हो रहा है बल्कि निर्माण की लागत और समय में भी उल्लेखनीय कमी आई है। उदाहरण के लिए, एक किलोमीटर सड़क में लगभग 150 ट्रक नई गिट्टी की बचत होती है और लगभग 13,000 लीटर डीजल की खपत भी घटती है। इसके साथ ही, इस तकनीक से बनी सड़कें अधिक मजबूत होती हैं और नमी के कारण होने वाली क्षति भी कम होती है।

उत्तर प्रदेश इस तकनीक को अपनाने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है और अन्य राज्यों को भी इसके प्रशिक्षण और फील्ड ट्रायल्स की सुविधा दी जा रही है। बिहार, राजस्थान, त्रिपुरा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, पंजाब, झारखंड समेत कई राज्यों ने एफडीआर तकनीक को अपनाने में रुचि दिखाई है। यूपीआरआरडीए के अधिकारियों के अनुसार, पारंपरिक निर्माण की तुलना में यह तकनीक 10-15% लागत में बचत करती है और तेज गति से निर्माण संभव बनाती है, जिससे ग्रामीण विकास की रफ्तार भी बढ़ी है।

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