UP मंत्री के ट्रस्ट पर जमीन खरीद विवाद: दलितों को बीमारी बताकर 19 बीघा जमीन खरीदने के आरोप

उत्तर प्रदेश में दलितों की जमीन खरीद विवाद एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। आरोप है कि UP मंत्री के ट्रस्ट ने 46 दलितों को ‘बीमार/विस्थापित’ दिखाकर 19 बीघा जमीन मात्र 10 करोड़ में खरीदी, जबकि एक साल बाद सरकारी टाउनशिप आने से जमीनों की कीमत चार गुना बढ़ गई। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

दलितों की जमीन खरीद विवाद ने मेरठ और लखनऊ की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के ट्रस्ट ने मेरठ में 46 दलित परिवारों की लगभग 19 बीघा जमीन सस्ती कीमत पर खरीदने के लिए उन्हें ‘गंभीर बीमार’ या ‘विस्थापित’ दिखाया।

यह जमीन लगभग 10 करोड़ रुपये में खरीदी गई, जबकि ठीक एक साल बाद इस क्षेत्र में सरकारी टाउनशिप प्रोजेक्ट की घोषणा हो गई, जिससे जमीनों की कीमत चार गुना तक पहुंच गई। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें न बीमारी थी और न ही विस्थापन की कोई स्थिति।

ग्रामीणों का आरोप—“बीमार नहीं थे, मेडिकल जबरन कराया गया”

कई दलित परिवारों ने बताया कि—

  • उन्हें अचानक गाड़ी में बैठाकर अस्पताल ले जाया गया
  • जबरन मेडिकल टेस्ट किए गए
  • रिपोर्ट में उन्हें गंभीर बीमारी से पीड़ित दिखा दिया गया

एक ग्रामीण ने आरोप लगाया—

“हम बिल्कुल ठीक थे। मेडिकल क्यों कराया, यह भी नहीं बताया। बस कहा—साइन करो और जमीन बेच दो।”

यूपी रेवेन्यू कोड क्या कहता है?

दलित अपनी जमीन गैर-दलित को तभी बेच सकता है जब—

  1. वह गंभीर बीमारी से पीड़ित हो,
  2. या वह विस्थापित हो रहा हो

इन दोनों स्थितियों में DM की अनुमति अनिवार्य है, जो जांच रिपोर्ट के आधार पर दी जाती है।

ग्रामीणों के बयान इस पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

जमीन 4 गुना महंगी कैसे हुई?

  • ट्रस्ट ने लगभग 19 बीघा जमीन 10 करोड़ में खरीदी
  • एक साल बाद सरकारी टाउनशिप योजना की घोषणा
  • प्रोजेक्ट आते ही जमीनों की कीमत 400% तक बढ़ गई

विपक्ष का आरोप—
“ट्रस्ट को पहले से सरकारी प्रोजेक्ट की जानकारी थी। इसी वजह से जमीनें कम दाम में खरीदी गईं।”

उठ रहे बड़े सवाल

  1. क्या दलितों को झूठा बीमार/विस्थापित दिखाया गया?
  2. मेडिकल रिपोर्ट किसके निर्देश पर बनी?
  3. DM की अनुमति कितनी वैध है?
  4. क्या सरकारी टाउनशिप की जानकारी का दुरुपयोग हुआ?
  5. बढ़ी कीमत का फायदा आखिर किसे मिला?

मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में

ग्रामीणों के आरोपों के बाद—

  • मेडिकल रिपोर्ट
  • DM अनुमोदन प्रक्रिया
  • जमीन खरीद के दस्तावेज
  • ट्रस्ट की भूमिका

—सब अब जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं।
राजनीतिक हलकों में यह मामला बड़ा विवाद बन चुका है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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