“BJP आग से खेल रही” – CM स्टालिन का बड़ा बयान, काले झंडे लगाने का आह्वान

तमिलनाडु में उबाल, DMK की आपात बैठक के बाद केंद्र के खिलाफ विरोध तेज; 16 अप्रैल को राज्यभर में प्रदर्शन की तैयारी

एम. के. स्टालिन ने काले झंडे के प्रयोग के खिलाफ परिसीमन की वकालत की। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की बैठक के बाद बीजेपी पर हमला, दक्षिण भारत में विरोध तेज।

हाइलाइट:

  • CM स्टालिन ने परिसीमन को बताया “ऐतिहासिक अन्याय”
  • BJP पर लगाया “आग से खेलने” का आरोप
  • 16 अप्रैल को काले झंडे लगाकर विरोध का आह्वान
  • DMK की इमरजेंसी मीटिंग में बनी रणनीति
  • लोकसभा सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर दक्षिणी राज्यों की चिंता

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे दक्षिणी राज्यों के साथ “ऐतिहासिक अन्याय” करार देते हुए जनता से काले झंडे लगाकर विरोध करने की अपील की है।

सीएम स्टालिन ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम सांसदों के साथ आपात बैठक के बाद कहा कि “बीजेपी आग से खेल रही है” और यदि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पीछे हटने का फैसला नहीं किया, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम सामने आएंगे।

क्या है पूरा मामला?

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक किए जाने की चर्चा है। यह बदलाव महिला आरक्षण कानून को लागू करने से भी जुड़ा बताया जा रहा है।

लेकिन तमिलनाडु समेत कई दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि नई जनसंख्या आधारित व्यवस्था से उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है।

स्टालिन का सख्त संदेश

स्टालिन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा—

  • “दक्षिण भारत के लोग गुस्से में हैं।”
  • “यह तमिलनाडु के साथ बड़ा अन्याय है।”
  • “अगर केंद्र नहीं माना तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

उन्होंने नारा दिया—
“काले झंडे लहराओ, तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा।”

16 अप्रैल को बड़ा विरोध

सीएम ने लोगों से अपील की है कि 16 अप्रैल को अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे लगाकर विरोध दर्ज कराएं।

इसके साथ ही DMK अन्य राज्यों के नेताओं और सांसदों से संपर्क कर इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति बनाने में जुट गई है।

राजनीतिक असर

यह मुद्दा अब सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे दक्षिण भारत में राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।
आने वाले दिनों में संसद के विशेष सत्र और विपक्ष की रणनीति इस विवाद को और तेज कर सकती है।

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