सपा में बढ़ता सनातनी रुझान :पहले मध्यमार्गी शिव, अब समाजवादी राम

समाजवादी राम को लेकर सपा सांसद वीरेंद्र सिंह के बयान से यूपी की राजनीति गरमा गई है। शिव भक्ति के बाद राम राजनीति में सपा के सनातनी बदलाव, अखिलेश यादव की रणनीति और राहुल गांधी के अयोध्या दौरे पर पूरी रिपोर्ट।

हाइलाइट्स :

  • सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने पेश किया ‘समाजवादी राम’ का विचार
  • अखिलेश यादव के शिव-भक्ति रुख के बाद नया सियासी प्रयोग
  • राम को लेकर बयान से सपा की रणनीति पर सवाल
  • कारसेवक गोलीकांड का दाग अब भी सपा के साथ
  • राहुल गांधी के रामलला दर्शन की चर्चा ने बढ़ाई सियासत

समाजवादी राम: सपा में सनातनी बदलाव या मजबूरी की राजनीति?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों समाजवादी राम चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। समाजवादी पार्टी के भीतर लगातार ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि पार्टी अब सनातन और हिंदुत्व से दूरी की पुरानी छवि को बदलने की कोशिश कर रही है। पहले अखिलेश यादव का शिवभक्ति अभियान और अब सपा सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा “समाजवादी राम” की व्याख्या—राजनीतिक हलकों में इसे नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि वे राम को मानते हैं, लेकिन उस राम को, जो वनवास के दौरान राजाओं से नहीं बल्कि वनवासियों की सहायता से रावण का वध करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अयोध्या लौटकर राजा बने राम नहीं, बल्कि बनवासी राम अधिक प्रिय हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है और आरोप लग रहे हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को भी अब सियासी चश्मे से देखा जा रहा है।

प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सपा की यह भक्ति राजनीतिक मजबूरी है। उन्होंने केदारेश्वर महादेव मंदिर को लेकर भी सपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

इसी बीच, अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद पासी के रुख में आए बदलाव को भी इस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सांसद बनने के लगभग एक साल बाद रामलला के दर्शन करने वाले अवधेश प्रसाद अब राम मंदिर की भव्यता और व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना कर रहे हैं।

हालांकि, समाजवादी पार्टी पर कारसेवकों पर गोली चलवाने का पुराना आरोप आज भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि जब भी राम मंदिर या हिंदुत्व का मुद्दा उठता है, सपा नेतृत्व असहज नजर आता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा द्वारा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के मुकाबले हिंदू एकजुटता की रणनीति अपनाने के बाद सपा को भी अपनी लाइन बदलनी पड़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या, मथुरा और काशी को भव्य बनाने के संकल्प ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।

इसी राजनीतिक माहौल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भी अयोध्या में श्रीराम लला के दर्शन की चर्चा तेज है। 23 जनवरी को रक्षा मामलों की संसदीय समिति का अयोध्या दौरा प्रस्तावित है, जिसमें राहुल गांधी भी सदस्य हैं।

कुल मिलाकर, समाजवादी राम की अवधारणा ने यूपी की राजनीति में एक नया विमर्श छेड़ दिया है—क्या यह सपा की वैचारिक यात्रा है या सिर्फ चुनावी मजबूरी?

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