यूपीपीएससी भर्ती विवाद ओम प्रकाश राजभर: MP-MLA कोर्ट का नोटिस, 24 फरवरी को सुनवाई

“यूपीपीएससी भर्ती विवाद ओम प्रकाश राजभर मामले में प्रयागराज की MP-MLA कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी किया। सपा अध्यक्ष श्याम लाल पाल की याचिका पर 24 फरवरी को अगली सुनवाई।

हाइलाइट्स:

  • प्रयागराज की MP-MLA कोर्ट ने ओम प्रकाश राजभर को नोटिस भेजा
  • UPPSC भर्ती को लेकर दिए गए बयान पर मानहानि परिवाद
  • सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने दायर की शिकायत
  • 24 फरवरी को अगली सुनवाई तय
  • एक करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति और सार्वजनिक माफी की मांग

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रयागराज स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने यूपीपीएससी भर्ती को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के मामले में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री Om Prakash Rajbhar को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे जवाब तलब किया है और मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित की है।

क्या है पूरा मामला?

परिवाद के अनुसार, 28 दिसंबर 2025 को बलिया जिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी सरकार (2012–2017) के दौरान Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) के माध्यम से चयनित 86 एसडीएम में से 56 यादव समुदाय से थे।

इस बयान को समाजवादी पार्टी ने पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि यूपीपीएससी के आधिकारिक अभिलेखों में ऐसा कोई तथ्य मौजूद नहीं है और मंत्री का बयान तथ्यों के विपरीत है।

सपा प्रदेश अध्यक्ष ने दायर किया परिवाद

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Shyam Lal Pal ने मंत्री के खिलाफ मानहानि और गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। सपा की ओर से 14 फरवरी को लीगल नोटिस भेजकर मंत्री से बयान वापस लेने और सार्वजनिक माफी की मांग की गई थी।

जब निर्धारित समयावधि में कोई जवाब नहीं मिला, तो अधिवक्ता विनीत विक्रम और मनीष खन्ना के माध्यम से अदालत में मामला दायर किया गया। अदालत ने परिवाद पर संज्ञान लेते हुए ओम प्रकाश राजभर को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

परिवाद में लगाए गए आरोप

परिवाद में कहा गया है कि मंत्री का बयान दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से दिया गया। इसमें आरोप लगाया गया है कि बयान से न केवल समाजवादी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ, बल्कि एक विशेष समुदाय को भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार से जोड़ने की कोशिश भी की गई।

सपा का दावा है कि 2012 से 2017 के बीच आयोजित किसी भी पीसीएस परीक्षा में यादव समुदाय से 56 अभ्यर्थियों का एसडीएम पद पर चयन नहीं हुआ था। ऐसे में बिना तथ्यों की पुष्टि किए इस प्रकार का बयान देना मानहानिकारक है।

एक करोड़ रुपये हर्जाने की मांग

परिवाद में अदालत से मांग की गई है कि मंत्री को दो राष्ट्रीय और एक स्थानीय समाचार पत्र में बिना शर्त माफी प्रकाशित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति भी मांगी गई है।

राजनीतिक हलचल तेज

इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। सपा इसे सामाजिक विभाजन की राजनीति करार दे रही है, जबकि मंत्री की ओर से अब तक औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अब सभी की निगाहें 24 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button