गृह मंत्रालय ने पहली बार जारी की राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति, जल-थल-वायु खतरे पर फोकस

“PRAHAAR राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति 2026 जारी। गृह मंत्रालय ने जल, थल, वायु, साइबर और CBRNED खतरों पर विस्तृत रणनीति बनाई। IB, NSG और राज्यों के समन्वय पर जोर।”

हाइलाइट्स:

  • गृह मंत्रालय ने पहली बार राष्ट्रीय काउंटर टेररिज्म पॉलिसी ‘PRAHAAR’ जारी की
  • सीमा पार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और स्लीपर सेल पर फोकस
  • CBRNED, ड्रोन, साइबर अटैक और डार्क वेब खतरों का उल्लेख
  • IB के MAC और NSG की भूमिका अहम
  • युवाओं की भर्ती रोकने और डि-रेडिकलाइजेशन पर विशेष रणनीति

नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गृह मंत्रालय ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक काउंटर टेररिज्म पॉलिसी ‘PRAHAAR’ (National Counter Terrorism Policy 2026) जारी की है। इस नीति में पारंपरिक आतंकवादी खतरों के साथ-साथ साइबर, ड्रोन और CBRNED जैसे उभरते जोखिमों को शामिल करते हुए बहु-आयामी रणनीति तैयार की गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में तैयार इस नीति का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाकर आतंकवाद के खिलाफ एकीकृत और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सीमा पार आतंकवाद और स्लीपर सेल पर फोकस

नीति में स्पष्ट किया गया है कि भारत को सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद, स्लीपर सेल नेटवर्क और संगठित आपराधिक गठजोड़ से निरंतर खतरा बना हुआ है। दस्तावेज में कहा गया है कि आतंकी संगठन भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

वैश्विक संगठनों जैसे अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIS) द्वारा सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से फंडिंग व कट्टरपंथी प्रचार फैलाने की आशंका जताई गई है।

CBRNED और ड्रोन खतरे पर विशेष सतर्कता

‘PRAHAAR’ में केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल (CBRNED) खतरों को उच्च जोखिम श्रेणी में रखा गया है। ड्रोन और रोबोटिक्स के दुरुपयोग को लेकर भी विशेष चेतावनी दी गई है।

नीति के तहत:

  • संवेदनशील स्थलों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम
  • CBRNED प्रतिक्रिया इकाइयों का प्रशिक्षण
  • आपात स्थिति में त्वरित समन्वित कार्रवाई
    पर जोर दिया गया है।

रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग

इंटेलिजेंस ब्यूरो के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) को सूचना साझा करने का प्रमुख प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसके साथ ही नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) को बड़े हमलों की स्थिति में राज्यों के साथ मिलकर त्वरित ऑपरेशन का दायित्व सौंपा गया है।

राज्यों और केंद्र के बीच डिजिटल डेटा इंटीग्रेशन और संयुक्त टास्क फोर्स की व्यवस्था को भी नीति में प्राथमिकता दी गई है।

वित्तीय नेटवर्क और कानूनी प्रहार

आतंकी फंडिंग पर रोक लगाने के लिए हवाला नेटवर्क, क्रिप्टो लेनदेन और अवैध हथियार आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सख्त निगरानी की जाएगी। आतंक से जुड़े संगठनों की संपत्तियों की जब्ती और कानूनी कार्रवाई को तेज करने की बात कही गई है।

युवाओं के डि-रेडिकलाइजेशन पर जोर

नीति में यह स्वीकार किया गया है कि आतंकी संगठन युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए सामुदायिक भागीदारी, धार्मिक नेताओं की भूमिका और जेलों में डि-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

अहम सेक्टरों की सुरक्षा

ऊर्जा, रेलवे, एविएशन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और इंटीग्रेटेड कमांड सिस्टम लागू किए जाएंगे।

‘PRAHAAR’ नीति आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को एक नया और समग्र ढांचा प्रदान करती है। जल, थल, वायु और साइबर—चारों मोर्चों पर समन्वित कार्रवाई के जरिए देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावी क्रियान्वयन से यह नीति भारत की सुरक्षा व्यवस्था में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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