नेपाल चुनाव: बालेन शाह की पार्टी सबसे आगे, पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली 4000 वोटों से पीछे

“नेपाल में आम चुनाव की मतगणना जारी है। बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 90 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने गढ़ झापा-5 सीट पर पीछे चल रहे हैं।”

काठमांडू। नेपाल में आम चुनाव की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। रैपर से नेता बने बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) चुनाव में सबसे आगे चल रही है।

अब तक सामने आए रुझानों में RSP 1 सीट जीतने के साथ 90 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह पार्टी 2022 में बनी थी और इस चुनाव में पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती देती नजर आ रही है।

अपने गढ़ में पिछड़ रहे पूर्व पीएम ओली

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने ही निर्वाचन क्षेत्र झापा-5 में पीछे चल रहे हैं।

वहां बालेन शाह उनसे करीब 4000 वोटों से आगे बताए जा रहे हैं। ओली इस सीट से 2017 और 2022 में जीत चुके हैं, इसलिए यह परिणाम नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

अन्य दलों की स्थिति

अब तक के रुझानों में प्रमुख दलों की स्थिति इस प्रकार है:

पार्टीजीतबढ़त
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP)193
नेपाली कांग्रेस110
CPN-UML09
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी08
अन्य02

नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा की पार्टी कुछ सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि पुष्प कमल दहल (प्रचंड) की पार्टी भी शुरुआती रुझानों में आगे चल रही है।

युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं बालेन शाह

काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह पहले नेपाल के हिप-हॉप म्यूजिक सीन में सक्रिय थे। उनके गानों में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे उठाए जाते थे।

2022 में उन्होंने काठमांडू मेयर का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतकर राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी थी।

बाद में वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए और पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।

नेपाल में कैसे चुने जाते हैं सांसद

नेपाल में संसदीय चुनाव मिश्रित प्रणाली से होते हैं।

1. प्रत्यक्ष चुनाव (FPTP)

  • कुल 275 में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं।
  • जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वह जीतता है।

2. अनुपातिक प्रतिनिधित्व

  • बाकी 110 सीटें पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर दी जाती हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को संसद में प्रतिनिधित्व देना है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर

नेपाल के इस चुनाव पर भारत, अमेरिका और चीन समेत कई देशों की नजर बनी हुई है।

भारत और नेपाल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए भारत के लिए वहां स्थिर सरकार बनना अहम माना जा रहा है।

वहीं चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका भी दक्षिण एशिया में अपने रणनीतिक हितों को देखते हुए चुनावी नतीजों पर नजर रखे हुए हैं।

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