नोएडा हिंसा मामले में छात्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, हाईकोर्ट जाने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार, कहा- पहले हाईकोर्ट जाइए, यहां 93 हजार मामले लंबित

सुप्रीम कोर्ट ने मजदूर प्रदर्शन हिंसा मामले में गिरफ्तार छात्रा आकृति चौधरी को जमानत देने से इनकार कर इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से 93 हजार मामले लंबित हैं।

नई दिल्ली। Supreme Court of India ने नोएडा हिंसा मामले में गिरफ्तार छात्रा को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने छात्रा को जमानत देने की मांग पर सुनवाई करते हुए कहा कि पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया जाए।

न्यायमूर्ति B. V. Nagarathna और न्यायमूर्ति Ujjal Bhuyan की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हर कोई सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहा है, जबकि यहां पहले से ही करीब 93 हजार मामले लंबित हैं।

Noida में 13 अप्रैल को हुए मजदूर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार छात्रा को Supreme Court of India से राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने छात्रा आकृति चौधरी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

न्यायमूर्ति B. V. Nagarathna और Ujjal Bhuyan की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हर कोई सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहा है, जबकि अदालत में पहले से करीब 93 हजार मामले लंबित हैं।

पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया गया। अदालत ने फिलहाल जमानत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही।

सुनवाई के दौरान छात्रा आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उचित कारण नहीं बताए। वकील ने अदालत को यह भी बताया कि आकृति चौधरी University of Delhi की छात्रा हैं।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केशव आनंद नामक व्यक्ति की याचिका पर उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों को नोटिस भी जारी किया है। याचिका में पुलिस पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं।

इससे पहले नोएडा की स्थानीय अदालत ने आकृति चौधरी, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता को पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दी थी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि पूछताछ के दौरान उनके वकीलों को मौजूद रहने दिया जाएगा।

पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल को औद्योगिक मजदूरों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे प्रदर्शन ने बाद में हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और एक वाहन में आग लगा दी।

पुलिस ने अदालत में दायर आवेदन में कहा था कि आरोपियों के घरों से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की संभावना है, इसलिए पुलिस हिरासत जरूरी है।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है। वहीं, मजदूर आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

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