“उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को सांसदों-विधायकों के फोन का जवाब देने और सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश दिए हैं। फोन न उठाने या प्रोटोकॉल तोड़ने पर कार्रवाई होगी। जानें योगी सरकार का नया आदेश और इसके राजनीतिक मायने।“\
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी पड़ सकती है। मुख्य सचिव S. P. Goyal ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
जारी शासनादेश के अनुसार, यदि कोई जनप्रतिनिधि कार्यालय में आता है तो अधिकारी अपनी सीट से उठकर हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करेंगे और बैठने के साथ पानी की व्यवस्था भी कराएंगे।
इसके अलावा जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल का जवाब देना भी अनिवार्य किया गया है। यदि कोई अधिकारी बैठक या अन्य सरकारी कार्य में व्यस्त है तो बाद में स्वयं फोन कर जवाब देना होगा।
विधानसभा में उठा था मुद्दा
दरअसल, पिछले कुछ समय से जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार यह शिकायत की जा रही थी कि कई अधिकारी उनके फोन नहीं उठाते और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुनते।
हाल ही में विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा था। नेता प्रतिपक्ष Mata Prasad Pandey ने अधिकारियों पर फोन न उठाने और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया था कि जनप्रतिनिधियों को पूरा सम्मान दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब मुख्य सचिव की ओर से विस्तृत शासनादेश जारी किया गया है।
शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायतों और समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण तथा समयबद्ध निस्तारण किया जाए।
साथ ही, कार्रवाई पूरी होने के बाद संबंधित जनप्रतिनिधि को इसकी जानकारी भी दी जाए। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि बातचीत के दौरान जनप्रतिनिधियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना जाए और समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक रवैया अपनाया जाए।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई
शासनादेश में साफ कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के साथ असम्मानजनक व्यवहार या प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ “उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली” के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि सरकार की ओर से पहले भी इस संबंध में कई आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक इस विषय पर 15 शासनादेश जारी किए जा चुके हैं, फिर भी कई अधिकारी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, जो बेहद खेदजनक है।
चुनाव से पहले अहम माना जा रहा आदेश
राजनीतिक जानकार इस आदेश को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना चाहती है, ताकि जनता से जुड़े मामलों का तेजी से समाधान हो सके।
सरकार का मानना है कि जब जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना जाता तो जनता के बीच उनकी स्थिति असहज हो जाती है। इसी को देखते हुए अब अधिकारियों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय कर दिया गया है।
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