योगी कैबिनेट का फैसला: उच्च शिक्षा के शिक्षकों-कर्मचारियों को 5 लाख तक कैशलेस इलाज

“यूपी कैबिनेट ने उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी दी है। इससे 1.28 लाख से अधिक शिक्षक लाभान्वित होंगे।”

लखनऊ। Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई Uttar Pradesh Cabinet की बैठक में उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

इस योजना के तहत प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षक, कर्मचारी और उनके आश्रित परिवार के सदस्य अब सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में बिना अग्रिम भुगतान के इलाज करा सकेंगे।

शिक्षक दिवस पर की गई थी घोषणा

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री Yogendra Upadhyay ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी मिल गई है।

किन्हें मिलेगा योजना का लाभ

नई व्यवस्था के तहत निम्न वर्ग के कर्मचारी इस योजना में शामिल होंगे:

  • अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित शिक्षक
  • स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक
  • स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक
  • राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित शिक्षक
  • शिक्षणेत्तर कर्मचारी

इसके अलावा लाभार्थियों के आश्रित परिवार के सदस्य भी योजना का लाभ उठा सकेंगे।

1.28 लाख से अधिक शिक्षक होंगे लाभान्वित

सरकार के अनुसार इस योजना से प्रदेश के 1,28,725 से अधिक शिक्षक और उनके परिवार लाभान्वित होंगे। इलाज की दरें Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana और National Health Authority द्वारा तय मानकों के अनुरूप होंगी।

प्रति शिक्षक तय हुआ प्रीमियम

योजना के संचालन के लिए प्रति शिक्षक 2479.70 रुपये का प्रीमियम निर्धारित किया गया है। इस योजना पर सरकार को लगभग 31 करोड़ 92 लाख 38 हजार रुपये प्रतिवर्ष खर्च करने होंगे।

‘साचीज’ के माध्यम से होगा संचालन

योजना का संचालन State Agency for Comprehensive Health and Integrated Services (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग हर वर्ष 30 जून तक लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण एजेंसी को उपलब्ध कराएगा।

हालांकि जो शिक्षक या कर्मचारी पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच मिलेगा और गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक बोझ कम होगा।

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लखनऊ से स्टेट हेड संजीव श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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