दूसरे दलों से आए नेताओं पर BJP का भरोसा, सुवेंदु अधिकारी समेत 11 नेता बने मुख्यमंत्री

कांग्रेस, टीएमसी, जदयू और क्षेत्रीय दलों से भाजपा में आए नेताओं को मिला सत्ता का शीर्ष पद; बंगाल में भाजपा की पहली सरकार के साथ फिर चर्चा में आया ‘बागी से मुख्यमंत्री’ मॉडल

पश्चिम बंगाल में Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनने के साथ भाजपा ने एक बार फिर साबित किया कि पार्टी दूसरे दलों से आए नेताओं को भी बड़ा मौका देती है। जानिए उन 11 मुख्यमंत्रियों की पूरी सूची, जो कांग्रेस, TMC, JDU, AGP और अन्य दल छोड़कर BJP में आए और मुख्यमंत्री बने।

नई दिल्ली। Bharatiya Janata Party ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद Suvendu Adhikari को मुख्यमंत्री बनाकर एक बार फिर यह संदेश दिया है कि पार्टी में दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को भी शीर्ष नेतृत्व का पूरा भरोसा और सम्मान मिलता है। सुवेंदु अधिकारी ऐसे 11वें नेता बन गए हैं, जिनकी राजनीतिक पारी भाजपा से नहीं शुरू हुई थी, लेकिन बाद में पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया गया।

बंगाल में पहली भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बने सुवेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनने के साथ ही सुवेंदु अधिकारी राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए। कभी Mamata Banerjee के करीबी माने जाने वाले सुवेंदु ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था। बाद में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख नेताओं में रहे।

वर्ष 2020 में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा। इसके बाद नंदीग्राम समेत कई इलाकों में भाजपा के जनाधार को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम मानी गई। 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

बिहार में सम्राट चौधरी बने भाजपा का ओबीसी चेहरा

Samrat Choudhary भी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने दूसरी पार्टियों से भाजपा तक का सफर तय किया। उन्होंने राजनीति की शुरुआत Rashtriya Janata Dal से की थी। बाद में वे Janata Dal (United) में गए और फिर भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा ने उन्हें बिहार में मजबूत ओबीसी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया। प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया।

कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कई नेता बने मुख्यमंत्री

भाजपा में शामिल होकर मुख्यमंत्री बनने वालों में कई ऐसे नेता हैं, जिनकी शुरुआत कांग्रेस से हुई थी। इनमें Himanta Biswa Sarma, Pema Khandu, Manik Saha और Gegong Apang जैसे नाम प्रमुख हैं।

असम में हिमंत बिस्वा सरमा लंबे समय तक कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल होकर राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन गए। वहीं अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और गेगोंग अपांग भी कांग्रेस से भाजपा में आए और मुख्यमंत्री बने।

पूर्वोत्तर में भाजपा का विस्तार और नए चेहरे

पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के विस्तार में दूसरे दलों से आए नेताओं की भूमिका अहम रही है। Sarbananda Sonowal पहले Asom Gana Parishad से जुड़े थे, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद असम के मुख्यमंत्री बने।

मणिपुर में N. Biren Singh और Yumnam Khemchand Singh भी भाजपा से पहले अन्य दलों में सक्रिय रहे। बाद में भाजपा ने दोनों नेताओं को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया।

दक्षिण भारत और झारखंड में भी दोहराया गया मॉडल

दक्षिण भारत में Basavaraj Bommai का उदाहरण सामने आया, जिन्होंने जनता दल से भाजपा में आने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

वहीं झारखंड में Arjun Munda ने शुरुआती दौर में Jharkhand Mukti Morcha से राजनीति की थी। बाद में भाजपा में शामिल होकर वे राज्य के सबसे प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाने लगे और कई बार मुख्यमंत्री बने।

भाजपा का संदेश: संगठन से बाहर के नेताओं को भी अवसर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में यह रणनीति अपनाई है कि दूसरे दलों से आने वाले प्रभावशाली नेताओं को संगठन में बड़ा स्थान देकर क्षेत्रीय राजनीति में तेजी से विस्तार किया जाए।

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि भाजपा अब केवल अपने पारंपरिक कैडर तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को भी सत्ता और संगठन में अहम भूमिका दे रही है।

मनोज शुक्ल

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