
राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क कौशाम्बी : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में बुधवार को तहसील चायल सभागार में “स्थायी लोक अदालत” विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं ने आमजन को निःशुल्क विधिक सहायता एवं त्वरित न्याय व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर प्रकाश डाला। वहीं स्थायी लोक अदालत के सदस्य सिकंदर ने सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं जैसे बिजली, पानी, डाक, परिवहन, टेलीफोन बिल व गृह कर से जुड़े मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया समझायी। तहसीलदार चायल पुष्पेन्द्र गौतम ने बताया कि तहसील विधिक सहायता क्लीनिक में शीघ्र ही पराविधिक स्वयंसेवक (पीएलवी) नियमित रूप से बैठेंगे, जिससे पीड़ितों को त्वरित सहायता मिल सकेगी। पैनल अधिवक्ता सगीर अहमद एडवोकेट ने कहा कि तहसील स्तर पर निःशुल्क विधिक सहायता एवं मुकदमों की पैरवी के लिए लोग उनसे संपर्क कर सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव आस्था मिश्रा ने कहा कि स्थायी लोक अदालतें आमजन को त्वरित, सरल, सस्ता और प्रभावी न्याय प्रदान करती हैं। उन्होंने बताया कि ये अदालतें सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण करती हैं और समझौता न होने की स्थिति में स्वयं निर्णय (अवार्ड) देकर एक करोड़ रुपये तक के मामलों का अंतिम निपटारा करने में सक्षम हैं।
उपजिलाधिकारी चायल अरुण कुमार ने कहा कि किसी भी प्रकार की निःशुल्क विधिक सहायता के लिए लोग जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या तहसीलों में नियुक्त पीएलवी से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों का समाधान अदालत में जाने से पहले ही मध्यस्थता के माध्यम से कराया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नरेन्द्र दिवाकर व धन्यवाद ज्ञापन उपजिलाधिकारी चायल ने किया। इस अवसर पर पीएलवी ममता दिवाकर, अमरदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में वादकारी, अधिवक्ता एवं आमजन उपस्थित रहे।





