“ऐसी हिम्मत फिर मत करना” – CJI सूर्यकांत की सख्त फटकार, भाई को फोन करने पर जताई नाराजगी

मेडिकल एडमिशन केस की सुनवाई के दौरान टिप्पणी; अवमानना कार्रवाई का संकेत, धर्म परिवर्तन के आधार पर दाखिले पर भी उठे सवाल

“सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल एडमिशन केस की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने भाई को फोन करने पर शख्स को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई के संकेत दिए।”

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल दाखिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता के परिजन पर कड़ी नाराजगी जताई। आरोप है कि याचिकाकर्ता के पिता ने मामले को लेकर CJI के भाई को फोन किया, जिस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी—“ऐसी हिम्मत फिर मत करना।”

सुनवाई के दौरान CJI ने वकील से पूछा कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “उनकी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई को फोन करने की? क्या वे मुझे निर्देश देंगे?”

अदालत का कड़ा रुख

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या हस्तक्षेप न्यायिक प्रक्रिया में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वर्षों से ऐसे मामलों से निपटते आ रहे हैं और किसी भी तरह की धमकी या प्रभाव डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।

क्या है मामला

यह मामला दो सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से जुड़ा है, जिन्होंने बौद्ध मेडिकल कॉलेज में अल्पसंख्यक कोटे के तहत प्रवेश की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया है।

धर्म परिवर्तन पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पहले भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि लाभ के लिए किया गया धर्म परिवर्तन “धोखाधड़ी का तरीका” हो सकता है और इससे वास्तविक अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं।

वकील ने मांगी माफी

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें इस फोन कॉल की जानकारी नहीं थी और उन्होंने अदालत से माफी मांगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी।

इस पूरे घटनाक्रम से सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप सख्ती से निपटाया जाएगा।

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