“West Asia Tension के बीच भारत सरकार ने राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है। जानें ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर क्या असर होगा।“
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IMG) का गठन किया है। इस समिति की कमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है। सरकार का यह कदम ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष के व्यापक असर को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
क्यों बनी यह समिति?
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर साफ दिखने लगा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया भर के देशों में चिंता बढ़ी है।
इन्हीं हालात को देखते हुए भारत सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने और त्वरित निर्णय लेने के लिए इस समिति का गठन किया है।
समिति में कौन-कौन शामिल?
इस उच्चस्तरीय समूह में कई अहम मंत्रालयों के मंत्री शामिल किए गए हैं, जिनमें:
- अमित शाह (गृह मंत्री)
- निर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री)
- हरदीप सिंह पुरी (पेट्रोलियम मंत्री)
इसके अलावा विदेश, वाणिज्य और अन्य संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस ग्रुप का हिस्सा हैं।
किन मुद्दों पर रहेगी पैनी नजर?
यह समिति निम्न प्रमुख बिंदुओं पर लगातार निगरानी रखेगी:
- पश्चिम एशिया में सुरक्षा और सैन्य स्थिति
- कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर प्रभाव
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, खासकर होर्मुज क्षेत्र की स्थिति
- विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और निकासी की तैयारी
- वैश्विक बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
ऊर्जा और अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी चिंता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें पश्चिम एशिया की अहम भूमिका है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
सरकार विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दे रही है कि देश में ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था की जा सके।
भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता
पश्चिम एशिया के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। जरूरत पड़ने पर निकासी अभियान (evacuation) की भी तैयारी रखी जा रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार हर स्तर पर सतर्क नजर आ रही है। राजनाथ सिंह की अगुवाई में बनी यह समिति देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हर संभावित स्थिति से निपटने की रणनीति तैयार कर रही है।
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