यूपी के पारंपरिक उद्योगों को नई उड़ान, CFC से जुड़ेंगे हजारों कारीगर

योगी सरकार का फोकस पारंपरिक उद्योगों पर, 90% अनुदान से मजबूत होंगे सूक्ष्म उद्यम

Yogi Government ODOP Plan: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने ओडीओपी योजना के तहत संचालित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) परियोजनाओं की समीक्षा की। बुनकरों, कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, स्किल ट्रेनिंग, 3डी प्रिंटिंग, सीएनसी मशीन और मार्केटिंग सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, खुर्जा और सहारनपुर समेत कई जिलों की परियोजनाओं पर चर्चा हुई।

लखनऊ। लखनऊ में मंगलवार को ओडीओपी योजना के तहत संचालित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रदेश सरकार ने पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, बुनकरी और सूक्ष्म उद्यमों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया। सरकार का लक्ष्य है कि इन केंद्रों का लाभ अधिक से अधिक कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों तक पहुंचे।

बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई सीएफसी में सीमित लाभार्थियों की स्थिति पर चिंता जताई है। इसी को देखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजनाओं का लाभ केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहे।

90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान

समीक्षा में बताया गया कि सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और 10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान रखा गया है। इन केंद्रों पर आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि छोटे उद्यमी भी तकनीकी रूप से मजबूत हो सकें।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएफसी से जुड़ी सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए मोबाइल संदेश, पंपलेट, उद्योग बंधु बैठकों और मीडिया माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया गया। साथ ही सभी केंद्रों में “सिटीजन चार्टर” प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए।

कई जिलों की परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में अंबेडकर नगर, मुरादाबाद, संभल, वाराणसी, खुर्जा, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या और गाजियाबाद की परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

  • अंबेडकर नगर बुनकर सीएफसी में लगभग चार करोड़ रुपये की सहायता से स्थापित परियोजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • वाराणसी के सिल्क उत्पाद सीएफसी में लगभग नौ करोड़ रुपये की सुविधाओं को अधिक कारीगरों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
  • गाजियाबाद इंजीनियरिंग एवं टूल रूम सीएफसी में सीएनसी मशीन, 3डी प्रिंटिंग, मटेरियल टेस्टिंग और स्किल ट्रेनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां अब तक 500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
  • मुरादाबाद के पीवीडी प्लांट को पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उदाहरण बताया गया।
  • संभल बटन उद्योग सीएफसी में 70 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग को सकारात्मक संकेत माना गया।

खुर्जा ब्लैक पॉटरी मॉडल बना उदाहरण

खुर्जा ब्लैक पॉटरी सीएफसी को बैठक में सफलता की मिसाल बताया गया। इस परियोजना से 1253 से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं और कारोबार 15-20 लाख रुपये से बढ़कर 90-95 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसे पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का सफल मॉडल बताया गया।

बुनकरों ने रखीं समस्याएं

बैठक में बुनकरों और कारीगरों ने बिजली दर, धागे की लागत, बाजार प्रतिस्पर्धा और तकनीकी उन्नयन से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने बुनकरों के लिए फ्लैट रेट विद्युत योजना के तहत 2006 से 31 मार्च 2023 तक लगभग 44 करोड़ रुपये का विद्युत व्यय वहन किया।

सरकार ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीक और बड़े बाजारों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।

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